भारत की पहचान जिनसे बनती है उनमें से एक है गंगा नदी। इसे भारत की जीवन रेखा कह सकते हैं। गंगा के बिना भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह भारत की सबसे लम्बी नदी है जो हिमालय के गोमुख से निकलकर अन्त में बंगाल की खाड़ी में जा मिलती है। अनेक छोटी-बड़ी नदियों को गंगा अपने में समाहित करती हुई वर्ष भर प्रवाहित होती रहती है और उत्तर भारत के मैदानी भाग को उर्वरा बनाती हुई हम सबका पालन-पोषण करती है। जहाँ कोई दूसरी नदी गंगा में मिलती है, उस स्थान को प्रयाग (संगम) का नाम दिया गया है। कर्णप्रयाग, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, इलाहाबाद (प्रयाग) ऐसे ही स्थान हैं। इलाहाबाद में गंगा में यमुना नदी का संगम हुआ है। गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम को त्रिवेणी कहा जाता है। सरस्वती नदी अब लुप्त हो गई हैं। संगम स्नान का विशेष महत्त्व हिन्दू धर्म में है।
गंगा के तट पर अनेक प्रमुख शहर बसे हैं। ऋषिकेश, हरिद्वार, इलाहाबाद, कानपुर आदि ऐसे ही नगर हैं। गंगाजल अत्यन्त पवित्र माना जाता है। गंगातट पर हरिद्वार और इलाहबाद में कुंभ मेले का आयोजन 12 वर्ष बाद किया जाता है। लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान करके पुण्य लाभ करते हैं। गंमा भारत.की सर्वाधिक पवित्र नदी मानी जाती है परन्तु वर्तमान समय में औद्योगिक प्रदूषण एवं नगरों से आने वाले नालों ने गंगाजल को प्रदूषित कर दिया है। नदियाँ हमारी माता हैं। उनकी स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है अतः हम सबका यह परम कर्त्तव्य है कि हम गंगा. को स्वच्छ रखें।