Question
इनमें से कौन गलत कथन है ?

Answer

स्वप्रयत्न

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एक वैद्युत द्विध्रुव के आवेश $q$ तथा द्विध्रुव-आघूर्ण $p$ है। ये एक वैद्युत क्षेत्र $E$ में $E$ की ही दिशा में रखा है। इस पर लगने वाला बल तथा स्थितिज ऊर्जा होगी:
विधुतचुम्बकीय तरंग का संचरण
यदि किसी इलेक्ट्रॉन और फोटॉन की ऊर्जा $( E )$ है और उनकी तरंगदैर्ध्य क्रमश $\lambda_{ e }$ तथा $\lambda_{ p }$ हों तो, इनवु बीच संबंध होगा:
निर्वात में रखे बिन्दुवत् आवेशों के मध्य बल 18 न्यूटन है। 6 परावैधुतांक की एक काँच की पट्टिका इन आवेशों के मध्य रख दी जाये तो बल का मान होगा-
निम्न में से कौन प्रकाश की कण-प्रकृति को दर्शाता है
$L C R$ श्रेणी परिपथ में शक्ति गुणांक अधिकतम होगा, यदि
एक चुम्बकीय लोहे के तार की लम्बाई l एवं चुम्बकीय आघूर्ण m है। यदि इसे L आकृति में मोड़ने पर इसकी प्रत्येक भुजा समान लम्बाई की रहती है तो नवीन आकृति का चुम्बकीय आघूर्ण होगा-
किसी द्रव की $r$ त्रिज्या की गोलाकार कुछ बूंदे मिलकर त्रिज्या $R$ तथा आयतन $V$ की एक बूंद बन जाती हैं। यदि द्रव का पृष्ठ तनाव $T$ हो तो, इस प्रक्रम में
किसी इलेक्ट्रॉन के संवेग को $P$ से परिवर्तन करने पर उससे संबद्व दे-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $0.5 \%$ परिवर्तित हो जाती है। इलेक्ट्रॉन का प्रारंभिक संवेग होगा :
विधुतचुम्बकीय तरंग होता है