Question
इस अंधड़ में साहस तोलो का क्या अर्थ है ?

Answer

"इस अंधड़ में साहस तोलो" का अर्थ है कि यह हमारे साहस की परीक्षा का समय है। ऐसे समय में ही मनुष्य को स्वयं को परखने का मौका मिलता है।

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विद्वान और मूर्ख व्यक्ति अपना समय भिन्‍न-भिन्‍न रीतियों से व्यतीत करते हैं । विद्वान अपने समय का सदुपयोग करते हैं । वे काव्य-साहित्य विभिन्‍न शास्त्रों का अध्ययन करके ज्ञान प्राप्त करते हैं; परंतु मूर्ख व्यक्ति आलस्य, जुआ, चोरी में अथवा दूसरे व्यर्थ विवाद करने में अपने समय का दुरुपयोग करते है । अतःव्यक्ति को समय का मूल्य पहचानना चाहिए तथा उसका सदैव सदुपयोग करना चाहिए ।
प्रश्न :$1.$ कौन-कौन अपनी जीवन भिन्‍न रीतियों से व्यतीत करते है।
$2.$ विद्वान अपना समय केसे व्यतीत करते है $?$
$3.$ मूर्ख अपना समय कैसे व्यतीत करते हैं $?$
$4.$ इस गद्य को उचीत शीर्षक दीजिए ।
बालक का मन कच्ची मिट्टी के समान होता है । कुम्हार अपने चाक के सहारे कच्ची मिट्टी को उचित रुप देता है| इसी प्रकार शिक्षक शिक्षा के द्वारा बालक के भविष्य का निर्माण करता है । बालक के मन में यह भावना भर देनी चाहिए कि में महान हूँ और अवसर प्राप्त होने पर अपनी शक्तियों को पूरा विकास कर सकता हूँ । हर एक बालक को संकल्प करना चाहिए कि में कड़ी मेहनत करके मेरे जीवन का विकास करेगा ।
प्रश्न : $1.$ बालक का मन किसके समान होता है $?$
$2.$ शिक्षक किसका निर्माण करता है $?$
$3.$ शिक्षक की तुलना किससे की गई है $?$
$4.$ सभी बालकों को क्या संकल्प करना चाहिए$?$
इस एकांकी के आधार पर बालक सर्वदरमन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।
सर्वदमन के व्यवहारों को देखकर दुष्यंत के मन में कौन-कौन से विचार आते थे ?
निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़कर नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर दीजिए $:$
हमारे इतिहास और पुराणों में परोपकार के अनेक उदाहरण मिलते हैं। दधिची जवबकरुयाण तथा असरों के संहार के लिए अपना शरीर त्याग दिया। राजा शिबि ने कबूतर के प्राण की रक्षा के लिए अंग दान किए। महर्षि दयानंद ने विष मिलाकर प्राण लेनेवाले अपने रसोइए जगन्नाथ के प्राणों की रक्षा धन देकर की। वर्तमान में भी अनेक सामाजिक संस्थाएँ परोपकार के लिए अपना धन और समय भारतीय समाज को दे रही हैं। भारतीय समाज में युगों से परोपकार की सुरसरिता प्रवाहित होती आई है। यहाँ ऋषि$-$मुनियों ने यही सीख दी है कि निराश्रितों को आसरा दो। दीन$-$दुखियों और वृद्धों की शारीरिक और आर्थिक मदद करो। भूखों को भोजन कराओ। विद्वान हो तो विद्या का प्रचार कर समाज का उद्धार करो। यहाँ सदा सबकी भलाई में ही अपनी भलाई मानी जाती रही है। संसार के सभी धर्मों का मूल परोपकार है। किसी भी संत$-$महात्मा ने इसके बिना मनुष्य जीवन को सार्थक नहीं माना। लोग परोपकार के लिए ही औषधालय, गौशालाएँ और धर्मशालाएँ बनवाते हैं। सभी अपनी सामर्थ्य और शक्ति के अनुसार परोपकार करते रहें तो समाज एवंदेश की उन्नति होती रहेगी तथा 'वसुधेव कुटुंबकम्‌!' की भावना फैलेगी ।
$(1)$ ऐतिहासिक ग्रंथों में परोपकार के कौन$-$कौन$-$से उदाहरण मिलते हैं?
$(2)$ ऋषि$-$मुनियों ने हमें क्या सीख दी है?
$(3)$ देश एवं समाज की उन्नति किस प्रकार होगी?
$(4)$ विलोम शब्द लिखिए $:$ आश्रित, अवनति
$(5)$ परिच्छेद के आधार पर अपने साथियों से पूछने के लिए तीन प्रश्न बनाइए ।
दुष्यंत ने पुरुवंशीय जीवन की कौन-सी दो रीतियाँ बताई ?