Question
उपवन की शोभा कैसी थी ?

Answer

उपवन में तरह-तरह के फूल खिले थे । फूलों पर ओस की बूँदे चमक रही थी । फूलों की सुगंध सारे उपवन में फैल रही थी । पेडों पर बैठे पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे । इस प्रकार उपवन की शोभा अत्यंत रमणीय थी ।

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प्रश्न :$1.$ कौन-कौन अपनी जीवन भिन्‍न रीतियों से व्यतीत करते है।
$2.$ विद्वान अपना समय केसे व्यतीत करते है $?$
$3.$ मूर्ख अपना समय कैसे व्यतीत करते हैं $?$
$4.$ इस गद्य को उचीत शीर्षक दीजिए ।
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$1.$ एक अच्छा जंगल क्‍या कहलाता है $?$
$2.$ जंगल को ज्यादा छाँटने या खत्म करने से क्या नुकसान होता है $?$
$3.$ जैविक भंडार घर में क्‍या उगाकर रखा जाता है $?$
$4.$ इस परिच्छेद को उचित शीर्षक दीजिए ।
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प्रश्न :
$1.$ पक्षी को सुख कहाँ मिलता है $?$
$2.$ मनुष्य के लिए अभिशाप कया है $?$
$3.$ मनुष्य के लिए स्वतंत्रता क्‍या है $?$
$4.$ इस गद्य को उचित शीर्षक दीजिए :
निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़कर नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर दीजिए $:$
हमारे इतिहास और पुराणों में परोपकार के अनेक उदाहरण मिलते हैं। दधिची जवबकरुयाण तथा असरों के संहार के लिए अपना शरीर त्याग दिया। राजा शिबि ने कबूतर के प्राण की रक्षा के लिए अंग दान किए। महर्षि दयानंद ने विष मिलाकर प्राण लेनेवाले अपने रसोइए जगन्नाथ के प्राणों की रक्षा धन देकर की। वर्तमान में भी अनेक सामाजिक संस्थाएँ परोपकार के लिए अपना धन और समय भारतीय समाज को दे रही हैं। भारतीय समाज में युगों से परोपकार की सुरसरिता प्रवाहित होती आई है। यहाँ ऋषि$-$मुनियों ने यही सीख दी है कि निराश्रितों को आसरा दो। दीन$-$दुखियों और वृद्धों की शारीरिक और आर्थिक मदद करो। भूखों को भोजन कराओ। विद्वान हो तो विद्या का प्रचार कर समाज का उद्धार करो। यहाँ सदा सबकी भलाई में ही अपनी भलाई मानी जाती रही है। संसार के सभी धर्मों का मूल परोपकार है। किसी भी संत$-$महात्मा ने इसके बिना मनुष्य जीवन को सार्थक नहीं माना। लोग परोपकार के लिए ही औषधालय, गौशालाएँ और धर्मशालाएँ बनवाते हैं। सभी अपनी सामर्थ्य और शक्ति के अनुसार परोपकार करते रहें तो समाज एवंदेश की उन्नति होती रहेगी तथा 'वसुधेव कुटुंबकम्‌!' की भावना फैलेगी ।
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