लेखक के अनुसार क्षण की विशेषता है की क्षण आते है और चले जाते है | उसके चक्कर काटने में स्मृतियो में उसकी छाप आती है | और चली जाती हैं , इस धुले हुए पाटव के भितर से कुछ आकर जाककर रुपरेखा से परिचय कराया जाता है | ये आकार क्षणों के शृंगार भी हो सकते है, चाहे कितनी ही सुखमय हो और वे आकार क्षणों के अभिशाप हो सकते है | कुछ ऐसी स्मृतिया होती है ,जो केवल कुछ क्षणों के लिए मस्तिष्क पर आती है | वे व्यक्ति ,ये घटनाए तथा वे परिस्थितिया धन्य है जिनकी अमिट छाप अनेक क्षणों तक मन पर बनी रहती है |