कृषि की अज्ञानता से लेखक ने बाजरा को पहले आदमी , समझा ,फिर छायादार पेड़ समझा | वह जानकर रामचरन के साथी सभी किसान जोर से हंसने लगे | लेखक समझ गए की उससे कुछ चुक हुई है | वह शर्मिंदा हो गया | दुसरे दिन उसको चिंता हुई की ऐसी चुक मुझसे दुबारा न हो जाए | इसीलिए कृषि शास्त्र की मोटी मोटी किताबे मंगवाकर उसने उनका अध्ययन आरम्भ कर दिया | लेखक ने रुपहले परदे पर जो देखा था वंहा वह था ही नहीं | उसको ऐसा लगा की आदर्श खेती गाँव में हो ही नहीं सकती , वह शहर में ही होती है | इसीलिए लेखक को देहात से निराशा हुई |