जैविक खाद एवं जैव उर्वरक — कृषि रसायण विज्ञान कक्षा 12 साइन्स — Question
Rajasthan Boardहिन्दी माध्यमकक्षा 12 साइन्सकृषि रसायण विज्ञानजैविक खाद एवं जैव उर्वरक4 Marks
Question
खलियों के प्रयोग विधि का वर्णन कीजिए।
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Answer
खलियों की प्रयोग विधि- (i) खलियों को खेत में डालने के बाद उनके अपघटन के लिए मृदा में पर्याप्त मात्रा में नमी का होना अति आवश्यक है। अतः इन्हें सिंचित अर्थात् पर्याप्त वर्षा वाले क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता है। (ii) खलियों का बुवाई पूर्व कूट-पीसकर चूर्ण बना लेना चाहिए। उसके पश्चात् उपर्युक्त समय पर एक बार में एक समान बिखेरकर जुताई कर खेत में मिला देनी चाहिए। (iii) खलियों में जितनी अधिक मात्रा में तेल होगा उतना ही उनका मृदा में अपघटन देरी से होगा। (iv) खलियों का उपयोग बुवाई पूर्व और पश्चात् दोनों ही तरह से किया जा सकता है। (1) बुवाई पूर्व प्रयोग- (i) महुआ की खल के अतिरिक्त सभी खालियों का चूर्ण बुवाई के 10-15 दिन पूर्व खेत में प्रयोग करना चाहिए। (ii) महुआ की खल का प्रयोग बुवाई के लगभग दो माह पूर्व करना चाहिए। इसमें सेपोनिक नामक रसायन पाया जाता है जिसके कारण यह धान की फसल के लिए सर्वोत्तम खली है। (iii) खलियों को खेत में बिखेरकर हल्की जुताई कर मिट्टी में मिला देनी चाहिए। (2) बुवाई पश्चात् प्रयोग- (i) अंकुरण पश्चात् पौधों के जमने के बाद पौधों के पास बारीक पिसी हुई खली के चूर्ण का प्रयोग करना चाहिए। (ii) कन्दमूल वाली फसलों में मिट्टी चढ़ाते समय खली का प्रयोग करना चाहिए।
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