Question
किसी चालक गोले के अन्दर विद्युत विभव

Answer

स्वप्रयत्न

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नाभिकीय विखण्डन में
एकला डिरी विवर्तन पैटर्न में, केन्द्रीय उच्चिप्ट के निकटवर्ती प्रथम निम्निप्ट पर, डििरी के किनारे तथा उसके मघ्य$-$बिन्दु से उत्पन्न हाइगेन्स-तरंगिकाओं के बीच कलान्तर होता है:
$m$ द्रव्यमान और $A$ काट के क्षेत्रफल वाला एक आयताकार ब्लॉक $\rho$ घनत्व वाले द्रव में तैर रहा है। यदि इसको साम्यावस्था से थोड़ा ऊर्ध्वाधर विस्थापित कर दिया जाये तो यह $T$ आवर्तकाल से दोलन करता है। तो
एक ' $R$ ' त्रिज्या के ठोस गोले पर एकसमान रूप से आवेश वितरित है। विद्युत क्षेत्र ' $E^{\prime}$ (गोले के अन्दर) तथा गोले की त्रिज्या ' $R$ ' में सम्बन्ध है
आरेख में दर्शाये गये अनुसार, रस्सी के सिरे से जुड़ा हुआ एक छोटा सा पिंड, किसी घर्षण रहित मेज पर घूमता है। यदि रस्सी को खींचकर रस्सी के तनाव में वृद्धि कर दी जाये और रस्सी को इतना खींचा जाय कि, पिंड की वर्तुल $($वृत्तीय$)$ गति की त्रिज्या पहले से आधी हो जाय तो, पिंड की गतिज ऊर्जा:
सम्पर्क में रखे गए उत्तल एवं अवतल लेन्स की फोकस दूरियाँ क्रमशः $13 cm$ और $18 cm$ हैं। संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी होगी
किसी दूरदर्शी के अभिदृश्यक व नेत्र लेन्स की फोकस दूरियाँ क्रमशः 100 cm व 5 cm हैं। यदि अंतिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है तो दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता होगी
$10^{-2}$वर्गमीटर क्षेत्रफल की एक वर्गाकार कुण्डली $10^3 Wb / m ^2$तीव्रता के समरूप चुम्बकीय क्षेत्र के लम्यवत् रखी है। वर्ग में से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स का मान होगा-
दो ध्वनि तरंगों के बीच कलान्तर $60^{\circ}$ है तो इनका पथान्तर होगा $-$
यदि एक मुक्त इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा दुगनी हो जाये तो डी. -ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य में बदलाव होगा :