Question
कर्ण की दानवीरता का वर्णन अपने शब्दों में करें।

Answer

कर्ण महादानी था। उसकी मान्यता थी कि समय आने पर शिक्षा नष्ट हो जाती है, मजबूत जड़ वाले पेड़ गिर पड़ते हैं, जल भी अपने स्थान पर जाकर सूख जाता है, परन्तु हवन किए गए एवं दान दिए गए द्रव्य यथावत् बने रहते हैं। इसीलिए जन्म के साथ उत्पन्न अपने रक्षक कवच और कुण्डल को भी उसने इन्द्र के माँगने पर निःसंकोच भाव से शल्य के मना करने पर भी दे दिया। जबकि वह जानता था कि बिना कवच और कुण्डल के युद्ध में जाने पर मैं मारा जाऊँगा तथा इंद्र मुझको मरवाने के लिए ही ब्राह्मण वेष में आकर हठपूर्वक इन्हें माँग रहा है। जान की बिना परवाह किए ही उसने इंद्र को कवच और कुंडल दे दिए और अपने वचन तथा दान धर्म की रक्षा की। यही है कर्ण की दानवीरता।

Need a full question paper?

Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.

Start Generating Free

Similar questions

सात्विक दान क्या है? पठित पाठ के आधार पर उत्तर दें।###सात्विक दान क्या है?
वृद्धबाघ पथिक को पकड़ने में कैसे सफल हुआ था?### बाघ ने पथिक को पकड़ने के लिए क्या चाल चली?
स्वामी दयानन्द कौन थे ? समाज सुधार के लिए उन्होंने क्या किया?
सोने के कंगण को देखकर पथिक ने क्या सोचा?
भारतीय जीवन में संस्कार का क्या महत्व है?
'मङ्गलम्' पाठ का पाँच वाक्यों में वर्णन करें।
रामप्रवेश राम किस प्रकार केंद्रीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में सफल हुआ?
‘नीतिश्लोकाः पाठ के आधार पर मनुष्य के षड् दोषों का हिन्दी में वर्णन करें।###अपना विकास चाहने वाले को किन-किन दोषों को त्याग देना चाहिए?### छ: प्रकार के दोष कौन हैं? पठित पाठ के आधार पर वर्णन करें।
पण्डिता क्षमाराव की प्रमुख कृतियों के नाम लिखिए।
विश्वशांति के सूर्योदय का पता कैसे चलता है?