Question
कवि किस प्रकार के जग बना-बनाकर रोज मिटाता है?

Answer

कवि अपनी कल्पना के अनुसार रोज नये-नये संसार की रचना करता है। उस रचना में उसे जब कोई दोष या कमी नजर आती है, भावनाओं की कमी रहती है, प्रेम की कमी रहती है तो वह उसे अस्वीकार कर मिटा देता है।

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