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लघुत्तरात्मक प्रश्नों उत्तर।[2M]

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Question 12 Marks
"यह अपूर्ण संसार न मझको भाता"-कवि को यह संसार अधूरा क्यों लगता है?
Answer
यह संसार अभाव, राग-द्वेष और स्वार्थपरता से व्याप्त होने से पूर्ण नहीं है। कवि संवेदनशील एवं मानवीय भावनाओं के संसार में रहता है। अत: उसकी कल्पनाओं के समक्ष यह संसार उसे अपूर्ण और अधूरा लगता है।
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Question 22 Marks
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' गीत में प्रेमाभिव्यक्ति किस तरह हुई है?
Answer
उक्त गीत में पथिक द्वारा अपने प्रियजनों के पास जल्दी पहुँचने की चिन्ता करने से तथा पक्षियों के द्वारा अपने बच्चे के पास दाना-चुग्गा लेकर जल्दी जाने के विचार से कवि ने मधुर प्रेमाभिव्यक्ति की है। जो प्रिय मिलन की याद से पैरों में चंचल गति भर देता है।
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Question 32 Marks
पक्षियों के परों में चंचलता आने का कारण क्या बताया गया है?
Answer
पक्षियों में भी ममता होती है। वे अपने घोंसलों की ओर लौटते समय सोचते हैं कि उनके बच्चे उनकी प्रतीक्षा कर रहे होंगे, दाने-चुग्गे की लालसा कर रहे होंगे। इसी से पक्षियों के परों में चंचलता आने का कारण बताया गया है।
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Question 42 Marks
दिन का थका पंथी क्या सोचकर जल्दी-जल्दी चलता है?
Answer
दिन का थका पंथी यह सोचता है कि उसके प्रियजन उसकी प्रतीक्षा में होंगे, वे उससे मिलने के लिए उत्सुक होंगे। मंजिल तक पहुंचने में कहीं रात न हो जावे, ऐसा विचार करके वह जल्दी-जल्दी चलता है।
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Question 52 Marks
कवि बच्चन रचित 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' गीत का प्रतिपाद्य बताइये।
Answer
इस गीत का प्रतिपाद्य यह है कि समय निश्चित गति से चलता है। पथिक को भी अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए गतिशील रहना चाहिए। जीवन में कुछ कर गुजरने का उत्साह, साहस एवं लगन रखनी चाहिए।
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Question 62 Marks
आत्मपरिचय' कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
Answer
आत्मपरिचय' कविता हमें हमारी अस्मिता, हमारी पहचान तथा हमारे परिवेश से अवगत कराती है। और यही प्रेरणा देती है कि हमें जीवन की समस्याओं से जूझते हुए भी जीवन में स्नेह-प्रेम की धारा अनवरत रूप से बहानी चाहिए तथा सुख-दु:ख को समान भाव से ग्रहण करते हुए मस्त रहना चाहिए।
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Question 72 Marks
"मैं भव-मौजों पर मस्त बहा करता हूँ"-'आत्मपरिचय' कविता की इस पंक्ति का क्या आशय है?
Answer
इस पंक्ति का आशय है कि संसार में तटस्थ मन:स्थिति में रहकर ही आनन्द प्राप्त होता है। संसार-सागर की लहरों के विरुद्ध संघर्ष करने की बजाय उनके साथ बहना तैरने में सहायक होता है। इसलिए कवि संसार रूपी सागर की मस्त लहरों में अपनी हृदयानुभूति के साथ मस्त होकर बहते हैं।
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Question 82 Marks
"मैं वह खण्डहर का भाग लिये फिरता हूँ"-'आत्मपरिचय' कविता की इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer
इसका आशय यह है कि यौवन में प्रिया के बिछुड़ जाने से कवि का हृदय उसकी मधुर यादों का खण्डहर जैसा बन गया है। वह अपने खण्डित हृदय में कोमल भावनाओं और मस्ती को लिये फिरता है। अर्थात् अपनी प्रियतमा के यादों के खण्डहर को लिये घूमते हैं।
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Question 92 Marks
कवि किस प्रकार के जग बना-बनाकर रोज मिटाता है?
Answer
कवि अपनी कल्पना के अनुसार रोज नये-नये संसार की रचना करता है। उस रचना में उसे जब कोई दोष या कमी नजर आती है, भावनाओं की कमी रहती है, प्रेम की कमी रहती है तो वह उसे अस्वीकार कर मिटा देता है।
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Question 102 Marks
"मैं और, और जग और, कहाँ का नाता" इस कथन से.कवि का क्या आशय है?
Answer
कवि का आशय है कि संसार के लोग स्वार्थी हैं, वे धन-वैभव के लिए लालायित रहते हैं। इसलिए कवि कहते हैं कि कहाँ मैं, जो निरपेक्ष स्वार्थ-रहित जीवन जीता हूँ और कहाँ ये संसार, जहाँ कदम-कदम पर स्वार्थी लोग हैं। उनसे मेरा रिश्ता भला कैसे हो सकता है।
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Question 112 Marks
नादान वही है, हाय'-कवि ने किसे नादान कहा है? और क्यों कहा है?
Answer
कवि ने 'आत्मपरिचय' कविता की इस पंक्ति में सांसारिकता के दाने चुगने में उलझे हुए व्यक्ति को नादान कहा है। क्योंकि जो व्यक्ति निरा भोगी और पेट की खातिर स्वार्थी होता है, वह नादान होता है तथा उसे सत्य का ज्ञान नहीं होता है।
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Question 122 Marks
"मैं, हाय, किसी की याद लिए फिरता हूँ।" इस कथन से कवि ने क्या व्यंजना की है?
Answer
आत्मपरिचय' कविता में कवि ने प्रेम की मस्ती के साथ अवसाद भी व्यक्त किया है, क्योंकि कवि को यौवन-काल में ही अपनी प्रियतमा का वियोग प्राप्त हुआ। कविता में 'हाय' शब्द से वियोग-व्यथा की व्यंजना की गई है।
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Question 132 Marks
'आत्मपरिचय' कविता में कवि ने जग-जीवन के विषय में क्या कहा है?
Answer
कवि ने जग-जीवन के विषय में कहा है कि इससे पूरी तरह कट कर या अलग रह कर जीवन जीना संभव नहीं है। दुनिया अपने व्यंग्य-बाण तथा शासन-प्रशासन से चाहे कितना भी कष्ट दे, उनके साथ चलकर ही इस जीवन का भार हमें हल्का करना है।
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Question 142 Marks
'आत्मपरिचय' कविता का प्रतिपाद्य बताइये।
Answer
आत्मपरिचय' कविता का प्रतिपाद्य अपने को जानने से है, जो कि दुनिया को जानने से कहीं अधिक कठिन है। समाज से व्यक्ति का नाता खट्टा-मीठा होता है। जीवन से पूरी तरह अलग रहना संभव नहीं होता है। फिर भी कवि की दुनिया उसी अपनी अस्मिता, अपनी पहचान और अपना परिवेश ही होता है। फिर भी दुनिया या संसार से सामंजस्य रखते हुए कवि जीवन में मस्ती, आनंद अपनाने का संदेश देता है।
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Question 152 Marks
"मैं सपनों का संसार लिये फिरता हूँ।" से कवि का क्या आशय है?
Answer
कवि-मन संवेदनशील होता है इसलिए वह अधिकतर सुन्दर कल्पनाओं में विचरण करता है। उसकी मधुर कल्पनाएँ प्रेम पूरित होती हैं, इसलिए कवि ने कहा कि मैं सपनों की अर्थात् कल्पनाओं की दुनिया में विचरण करता हूँ।
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Question 162 Marks
"है यह अपूर्ण संसार न मुझको भाता" कवि को यह संसार अपूर्ण क्यों लगता है?
Answer
मानव-जीवन में प्रेम का सर्वोपरि महत्त्व है तथा जीवन की सरलता, सरसता सब प्रेम पर ही टिकी होती है। कवि को ऐसा कोई प्रेमी हृदय नहीं मिला जिससे वह अपनी भावनाएं व्यक्त कर सके, इसलिए उन्हें यह संसार अपूर्ण लगता है।
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Question 172 Marks
मैं निज उर के उद्गार लिये फिरता हूँ' पंक्ति से बच्चनजी का क्या आशय है?
Answer
इसमें कवि का आशय है कि वह स्वयं के हृदय के उद्गार अर्थात् भावनाएँ, जो दुःख-सुख, निराशा, संवेदना, वेदना, निस्सारता, संसार की नश्वरता आदि से जुड़ी हैं उन्हें अपने हृदय तक ही सीमित रखते हैं। उन्हें साथ लिये वे अपना जीवन यापन करते हैं।
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Question 182 Marks
संसार में कष्टों को सहते हुए भी खुशी और मस्ती का माहौल कैसे पैदा किया जा सकता है?
Answer
संसार में सुख और दुःख दोनों मिलते हैं, परन्तु इसमें दुःख एवं कष्ट अधिक सहने पड़ते हैं। फिर भी व्यक्ति को चाहिए कि वह अनेक कष्टों को सहते हुए उनके ही बीच से खुशी और मस्ती का वातावरण तैयार करे, कुछ करने की चाह रखे और सबसे प्रेम-व्यवहार बढ़ाये, ऐसा प्रयास करने पर जीवन में खुशी और मस्ती का माहौल बनाया जा सकता है।
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Question 192 Marks
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है'-की आवृत्ति से कविता की किस विशेषता का पता चलता है?
Answer
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' पंक्ति की आवृत्ति गीत की 'टेक' है, इससे कविता की गेयता तथा श्रुति-मधुरता की विशेषता व्यक्त हुई है। कविता में इस आवृत्ति से यह व्यंजित हुआ है कि जीवन का समय कम है और काम बहुत है। मनुष्य को लक्ष्य प्राप्त करने में जल्दी करनी चाहिए।
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Question 202 Marks
बच्चे किस बात की आशा में नीड़ों से झाँक रहे होंगे?
Answer
बच्चे इस बात की आशा में नीड़ों से झांक रहे होंगे कि उनके माता-पिता उनके लिए दाना-चुग्गा (भोजन), लेकर आ रहे होंगे। बच्चों को खाने की प्रतीक्षा होगी, साथ ही उनसे ढेर सारा प्यार भी मिलने के लिए वे उत्सुक होंगे।
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Question 212 Marks
शीतल वाणी में आग के होने का क्या अभिप्राय है?
Answer
शीतल वाणी में आग होने' का आशय यह है कि कवि का स्वभाव और स्वर भले ही कोमल हैं, परन्तु उसके हृदय तथा विचारों में विद्रोह एवं जोश की कमी नहीं है। वह हृदयगत जोश से प्रेम-रहित संसार को अपनी शीतल वाणी में दुत्कारता है, फिर भी अपना होश नहीं खोता है। इस तरह कवि अपने शीतल उद्गारों के पीछे हृदय के जोश, बल, शक्ति की बात कहते हैं।
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Question 222 Marks
मैं और, और जग और, कहाँ का नाता'-पंक्ति में 'और' शब्द की विशेषता बताइये।
Answer
यहाँ'और' शब्द का प्रयोग तीन बार तीन अर्थों में हुआ है। इसमें 'मैं और' का आशय है कि मैं अन्य लोगों से हटकर हूँ। 'जग और' का तात्पर्य है कि यह संसार भिन्न प्रकार का है। इन दोनों वाक्यों के मध्य में आया 'और' योजक अव्यय रूप में प्रयुक्त हुआ है। इससे यमक अलंकार का चमत्कारी प्रयोग हुआ है।
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Question 232 Marks
जहाँ पर दाना रहते हैं, वहीं नादान भी होते हैं'-कवि ने ऐसा क्यों कहा होगा?
Answer
इसमें 'दाना' स्वार्थपरता, लोभ-लालच, सांसारिकता एवं चेतना का प्रतीक है। संसार में ज्ञानी और अज्ञानी दोनों ही तरह के लोग सत्य को खोज रहे हैं, परन्तु स्वार्थ की चिन्ता करने वाले लोग अज्ञानी हैं। जो दाने के लोभ में फँस , जाते हैं वे स्वाभाविक रूप से नादान व सांसारिक षड्यंत्र के प्रति भोले होते हैं।
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Question 242 Marks
कविता एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करती है और दूसरी ओर 'मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हैं'-विपरीत से लगते इन कथनों का क्या आशय है?
Answer
प्रस्तुत कविता में कवि स्वयं को जग से जोड़ने और उससे अलग रहने की बात भी करता है। वह संसार की चिन्ताओं एवं व्यथाओं के प्रति सजग है। इस तरह वह संसार की निन्दा-प्रशंसा की चिन्ता न करके उससे प्रेम कर उसका हित साधना चाहता है।
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