हिन्दी कविता और आलोचना में विष्णु खरे एक विशिष्ट हस्ताक्षर हैं। इनका जन्म 1940 ई. में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हुआ। ये विश्व सिनेमा के अच्छे जानकार हैं। ये फिल्मों को समाज, समय और विचारधारा के आलोक में देखते हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ कविता संग्रह-एक गैर रूमानी समय में, खुद अपनी आँख से, सबकी आवाज पर्दे में, पिछला बाकी। आलोचना-आलोचना की पहली किताब, सिनेमा पढ़ने के तरीके आदि। इनको रघुवीर सहाय सम्मान, शिखर सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, फिनलैंड का राष्ट्रीय सम्मान, नाइट ऑफ द ऑर्डर ऑफ दि व्हाइट रोज आदि से सम्मानित किया किया जा चुका है।