मध्यकालीन साख की अवधि 15 माह से 5 वर्ष होती है। मध्यकालीन साख कृषक कृषि यंत्र खरीदने, कुआँ खुदवाने, भूमि में सुधार करने आदि के लिए लेता है। दीर्घकालीन साख की अवधि पाँच वर्ष से अधिक होती है। दीर्घकालीन साख पुराने ऋणों को चुकाने, लघु सिंचाई सुविधाओं, भू-संरक्षण, बंजर भूमि को खेती योग्य बनाने, भूमि खरीदने, भूमि में स्थायी सुधार लाने, भारी मशीनरी खरीदने आदि हेतु लिया जाता है।