1. प्रस्तावना - किसी भी देश की समृद्धि एवं विकास का मुख्य आधार उसकी आर्थिक एवं उत्पादन क्षमता होती है। जिस प्रकार भारत देश प्राचीन काल से ही ज्ञान - विज्ञान के क्षेत्र में विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित है, उसी प्रकार वर्तमान में आर्थिक सम्पन्नता की दृष्टि से भी भारत विश्व के प्रगतिशील देशों में अग्रणी बनता जा रहा है। इसके लिए स्वदेशी की भावना निरन्तर प्रत्येक भारतीय के हृदय में विकसित होना आवश्यक है।
2. मेक इन इंडिया प्रारम्भ एवं उद्देश्य - भारत को सुख - सुविधा सम्पन्न और समृद्ध बनाने, अर्थव्यवस्था के विकास की गति बढ़ाने, औद्योगीकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने और रोजगार का सृजन करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा 25 सितम्बर, 2014 को वस्तुओं और सेवाओं को देश में ही बनाने के लिए 'मेक इन इंडिया' यानी 'भारत में बनाओ' (स्वदेशी उद्योग) नीति की शुरुआत की थी।
इसके माध्यम से सरकार भारत में अधिक पूँजी और तकनीकी निवेश पाना चाहती सरकार का प्रयास है कि विदेशों में रहने वाले सम्पन्न भारतीय तथा अन्य उद्योगपति भारत में आकर अपनी पँजी से उद्योग लगा वे अपने उत्पादन को भारतीय बाजार तथा विदेशी बाजारों में बेचकर मुनाफा कमा सकेंगे तथा भारत को भी इससे लाभ होगा।
3. स्वदेशी उद्योग - मेक इन इंडिया का ही स्वरूप स्वदेशी उद्योग है। अपने देश को सुख - सुविधा सम्पन्न और समृद्ध बनाने के लिए स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ही उक्त नीति को प्रारम्भ किया गया है। वर्तमान में कोरोना महामारी के बाद तो इसके स्वरूप को और अधिक विस्तृत करते हुए इसे 'आत्मनिर्भर भारत' नाम दिया गया है, जिसका प्रमुख लक्ष्य अपने देश को पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाते हुए विदेशी पूँजी को भी भारत में लाना तथा रोजगार के अवसर विकसित करना है।
4. योजना के लाभ - 'मेक इन इंडिया' अथवा 'स्वदेशी उद्योग' की योजना के द्वारा सरकार विभिन्न देशों की कम्पनियों को भारत में कर छूट देकर अपना उद्योग भारत में ही लगाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे भारत का आयात बिल कम हो सके और देश में रोजगार का सृजन हो सके। इस योजना से निर्यात और विनिर्माण में वृद्धि होगी जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार होगा, साथ ही भारत में रोजगार सृजन भी होगा।
5. उपसंहार - 'मेक इन इंडिया' की शुरुआत होने के बाद से और विशेषतः कोराना वैश्विक महामारी के कारण भारत देश निवेश के लिए न केवल बहुराष्ट्रीय कम्पनियों अपितु विदेशों में रहने वाले भारतीय उद्योगपतियों की पहली पसन्द बन गया है। आज भारत 'स्वदेशी उद्योग' अथवा 'मेक इन इंडिया' नीति के कारण रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक, हार्डवेयर आदि क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनता हआ विश्व का एक सम्पन्न और समृद्ध राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है।