2. पर्यावरण के रक्षक : वन - पर्यावरण की रक्षा करने वाले अर्थात् पर्यावरण को शुद्ध रखने वाले प्राकृतिक साधनों में हरियाली, वृक्षावली तथा वनों का विशेष महत्त्व है। वन विभिन्न प्राकृतिक क्रियाओं के द्वारा पर्यावरण की रक्षा करते हैं, अशुद्ध वायु को शुद्ध कर उसे स्वास्थ्य के अनुकूल बनाते हैं। वृक्षों की पत्तियाँ वातावरण में अशुद्ध वायु अर्थात् कार्बन डाइ - ऑक्साइड को ग्रहण कर ऑक्सीजन का उदवमन करती हैं। वनों के आकर्षण से बादल जल बरसाते हैं और धरती उपजाऊ बन जाती है। इस प्रकार वन तथा वृक्षावली पर्यावरण के रक्षक माने जाते हैं।
3. कटते जंगल : एक समस्या - वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि के कारण जंगल तीव्र गति से कट रहे हैं। लोगों के आवास - योग्य मकानों के लिए, ईंधन, इमारती लकड़ी, फर्नीचर, उद्योग - धन्धों की जरूरतों के लिए वनों को काटा जा रहा है। उद्योगों की स्थापना तथा सड़कों के निर्माण में वनों की भूमि का विदोहन तीव्र गति से हुआ है। मकानों के लिए पत्थर, लकड़ी आदि की पूर्ति के लिए वन उजाड़े गये हैं। इन सभी कारणों से आज कटते जंगल पर्यावरण के लिए एक भारी समस्या बन गये हैं।
4. कटते वनों की रोकथाम के प्रयास - वर्तमान में कुछ सामाजिक संगठन, पर्यावरण प्रदूषण निवारक संस्था तथा कुछ सरकारी विभाग वनों की सुरक्षा एवं वृक्षारोपण का अभियान चला रहे हैं। उत्तराखण्ड में 'चिपको आन्दोलन', कर्नाटक में 'अप्पिको आन्दोलन के द्वारा वनों की कटाई का विरोध किया जा रहा है। राजस्थान में विश्नोई समाज ने वृक्षों की कटाई के विरोध में कई बलिदान दिये हैं। देश के अन्य राज्यों में भी 'वृक्ष - मित्र - सेना' द्वारा वनों की कटाई का विरोध हो रहा है। वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय द्वारा कठोर कानून बनाकर वनों की कटाई रोकी जा रही है।
5. समाधान एवं उपाय - कटते जंगलों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा अनेक कानूनी उपाय किये जा सकते हैं। सामाजिक संगठन 'चिपको आन्दोलन' की तरह अपने - अपने क्षेत्र में आन्दोलन चलाकर जन - जागरण के द्वारा वनों के . विनाश को रोक सकते हैं। सरकार इस सम्बन्ध में कठोर दण्ड - व्यवस्था प्रारम्भ करे और वृक्षारोपण को प्राथमिकता देकर पर्यावरण की स्वच्छता पर पूरा ध्यान दे। इस प्रकार के अन्य उपाय करने से धरती को वृक्षावलियों से हरा - भरा रखा जा सकता है।
6. उपसंहार - वर्तमान में वनों की अन्धाधुन्ध कटाई होने से पर्यावरण प्रदूषण का भयानक रूप उभर रहा है। इस दिशा में कुछ मानवतावादी चिन्तकों एवं पर्यावरणविद् वैज्ञानिकों का ध्यान गया है। उन्होंने कटते जंगल और घटते मंगल को एक ज्वलन्त समस्या मानकर इसके निवारण के सुझाव भी दिये हैं।
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