Question
मिश्रित फसल के महत्व पर प्रकाश डालिए।

Answer

मिश्रित फसल का महत्व-
(1) प्रतिकूल मौसम, जलवायु दशाओं के विरुद्ध बीमा-
मौसम के प्रतिकूल प्रभाव से एक फसल क्षतिग्रस्त हो जाती है तो दूसरी फसल से कुछ उपज अवश्य प्राप्त हो जाती है। जैसे-गेहूँ सरसों के मिश्रण में वर्षा के प्रभाव से सरसों की फसल से नुकसान होने पर गेहूँ की फसल अवश्य मिल जायेगी। इसी प्रकार सिंचाई जल के अभाव में गेहूँ की अपेक्षा सरसों की उपज अच्छी प्राप्त हो सकेगी।
(2) मृदा कटाव रोकने में मदद- सीधी बढ़ने वाली और फैलकर चलने वाली दोनों फसलें साथ-साथ बोने से मृदा कटाव में कमी आ जाती है क्योंकि भूमि पर दोनों फसलें अधिकतम स्थान पर आवरण का कार्य करती हैं। वर्षा की बूँदों का सीधा प्रभाव मृदा पर नहीं पड़ता। साथ ही पौधों की जड़े मृदा को बाँधकर भू-संरक्षण से सहायता करती हैं।
(3) कृषक की घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति- मिश्रित फसलें बोने से किसान को कम क्षेत्र से ही अनाज, दाल, तिलहन, दलहन, मसाले वाली फसलों की उपज प्राप्त हो जाती है। इससे घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।
(4) मृदा उर्वरता बनाए रखने में सहायक- मिश्रित फसलें मृदा की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होती हैं। मिश्रित फसल में इनकी जड़ों द्वारा विभिन्न गहराइयों से पोषक तत्व ग्रहण किये जाते हैं। साथ ही दलहनी फसलों के मिश्रण से मृदा में नाइट्रोजन स्थिरीकरण अधिक होता है, जिससे मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
(5) पशुओं हेतु पौष्टिक चारे की प्राप्ति- मिश्रित फसलों के चारे पशुओं के लिए अधिक पौष्टिक तथा स्वादिष्ट होते हैं। जैसे-मक्का लोबिया, बरसीम + सरसों, जई + मेथी।

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