मुद्रा बाजार-मुद्रा बाजार एक कम अवधि की निधियों का बाजार है जो ऐसी द्रव्य सम्पत्तियों का निपटारा करता है जिनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष तक होती है। यह एक ऐसा बाजार है जहाँ कम जोखिम, आरक्षित तथा अल्पकालिक ऋणपत्र होते हैं, जो कि उच्च तरल दैनिक निर्गमित तथा सक्रिय व्यापार योग्य होते हैं। इनकी कोई भौतिक स्थानिकता नहीं होती है। परन्तु यह ऐसी क्रियाविधि है जो टेलीफोन व इण्टरनेट के माध्यम से सम्पादित की जाती है। ये मुद्रा बाजार अस्थायी नकदी की कमी एवं देनदारियों के निपटारे की जरूरतों को पूरा करने के लिए अल्पकालिक निधि उगाहने में सक्षम होते हैं तथा आय वापसी के लिए उपयुक्त होते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक, वाणिज्यिक बैंक, गैर-बैंकिंग वित्त कम्पनियाँ, राज्य सरकारें, बड़े औद्योगिक घराने तथा म्युचुअल फण्ड इस बाजार के प्रमुख प्रतिभागी हैं।
मुद्रा बाजार में प्रयुक्त प्रपत्र-
1. ट्रेजरी बिल-ट्रेजरी बिलों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार की ओर से लघु अवधि की देयता के रूप में निर्गमित किया जाता है तथा इन्हें बैंकों एवं जन-साधारण में विक्रय किया जाता है। इनके निर्गमन का समय 14 दिन से 364 दिन तक होता है। ये बिल विनिमय साध्य विलेख के रूप में होते हैं।
2. व्यापारिक बिल-व्यापारिक बिल सामान्यतः एक व्यावसायिक फर्म द्वारा दूसरी फर्म पर लिखे जाते हैं। ये लघु अवधि के प्रपत्र होते हैं जो सामान्यतया 90 दिन के लिए निर्गमित किये जाते हैं। ये स्वयं परिशोधित होते हैं क्योंकि भुगतानकर्ता निश्चित तिथि को इनका भुगतान करता है।