मुद्रण क्रान्ति - मुद्रण क्रांति का तात्पर्य केवल किताबों का नया और विकसित होने से नहीं था बल्कि इसने छापाखाने में यूरोपीय लोगों की जिंदगियों को पूरी तरह से बदल दिया। छापेखाने का आविष्कार महज तकनीकी दृष्टि से नाटकीय बदलाव की शुरुआत नहीं थी। पुस्तक उत्पादन के नए तरीकों ने लोगों की जिदगी बदल दी। इसके बाद सूचना और ज्ञान से, संस्था और सत्ता से उनका रिश्ता ही बदल गया। इससे लोकचेतना बदली और चीजों को देखने का नजरिया बदल गया।
मुद्रण क्रान्ति का फ्रांस की क्रान्ति पर प्रभाव - छपाई के कारण ज्ञानोदय से वॉल्टेयर और रूसो जैसे चिन्तकों के विचारों का प्रचार-प्रसार हुआ। सामूहिक रूप से उन्होंने परम्परागत, अन्धविश्वास और निरंकुशवाद की आलोचना प्रस्तुत की। उन्होंने 'तार्किकता' का प्रचार-प्रसार किया। इसने लोगों को राजशाही के विरुद्ध विद्रोही हेतु प्रेरित किया।
मुद्रण ने समस्त पुराने मूल्यों, संस्थाओं और नियमों पर आम जनता के मध्य बहस-मुबाहिसे और धार्मिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श का मार्ग प्रशस्त किया।
कार्टूनों और कैरिकेचरों (व्यंग्य चित्रों) में यह भाव सामने आता था कि जनता तो मुश्किल में फँसी है जबकि राजशाही भोग-विलास में डूबी हुई है। इसने क्रान्ति की ज्वाला भी भड़काई। अतः स्पष्ट है- "मुद्रण संस्कृति ने फ्रांसीसी क्रान्ति के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ रची थीं।"