Question
नदी जल स्वच्छता अभियान

Answer

1. प्रस्तावना - जल के प्रमुख स्रोतों में नदियों का महत्त्व सर्वविदित है। परन्तु वर्तमान में नदियों में अनेक कारणों से प्रदूषण फैल रहा है। इसलिए भारत सरकार के जल - संसाधन मंत्रालय द्वारा गंगा तथा अन्य सहायक नदियों के स्वच्छता का अभियान 'नमामि गंगे' नाम से चलाया जा रहा है। 

2. नदी जल प्रदूषण के कारण - नदी जल प्रदूषण वास्तव में कोई नई समस्या नहीं है। अनेक तरह के औद्योगिक अपशिष्टों से, नालियों एवं सीवरेज मल - जल से गंगा आदि नदियों का पानी प्रदूषित हो रहा है। पशुओं को नहलाने, कपड़े धोने, विषैले रसायन आदि से भी नदियों में जल दूषित हो रहा है। इसी प्रकार प्लास्टिक थैले और वस्तुएँ, ठोस अपशिष्ट और फूल - मालाओं का नदियों में नियमित अपवहन प्रदूषण का दूसरा कारण है। जलाशयों के पास खुले स्थानों पर कई प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करने वाले लोग भी नदियों का प्रदूषण बढ़ाते हैं। 

3. नदी प्रदूषण के प्रभाव - नदियों में होने वाला प्रदूषण पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के साथ मानव तथा अन्य जीवों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। यह मनुष्यों में स्वास्थ्य सम्बन्धी कई समस्याओं और विकारों को बढ़ावा देता है। नदी में होने वाला प्रदूषण जलीय जीवों के जीवन को भी प्रभावित करता है, इससे मछलियों की वृद्धि और विकास पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ता है और बड़े पैमाने पर इनकी मृत्यु हो जाती है। लम्बे समय तक लगातार चलने वाले नदी प्रदूषण से जैव विविधता को नुकसान हो सकता है और कुछ प्रजातियों को विलुप्त और पूरी तरह से पारिस्थितिक तन्त्र को बाधित कर सकता है। 

4. नदी स्वच्छता अभियान - नदी प्रदूषण को रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए। यह कार्यक्रम उन लोगों के लिए होना चाहिए, जो प्रदूषण का कारण नहीं जानते हैं। नदी प्रदूषण की रोकथाम हेतु सबसे आवश्यक बात यह है कि हमें नदी प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली प्रक्रियाओं पर ही रोक लगा देनी चाहिए। इसके तहत किसी भी प्रकार का अपशिष्ट पदार्थ नदियों में मिलने न दिया जाए। नदियों के आसपास गन्दगी करने, उनमें नहाने, कपड़े धोने आदि पर भी रोकथाम लगानी चाहिए। नदियों में पशुओं को नहलाने पर भी पाबन्दी होनी चाहिए। उद्योगों को सैद्धान्तिक रूप से नदियों के निकट स्थापित नहीं होने देना चाहिए। 

5. उपसंहार - हमारे देश में लोग नदियों की पूजा देवी और देवताओं के रूप में करते हैं। लेकिन क्या विडम्बना है कि नदियों के प्रति हमारा गहन सम्मान और श्रद्धा होने के बावजूद हम उसकी पवित्रता, स्वच्छता और भौतिक कल्याण बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं। अतः हमें नदी स्वच्छता अभियान का प्रचार कर इन्हें प्रदूषण से मुक्त करने का प्रयास करना चाहिए।

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