Question
समाचार - पत्र ### समाचार - पत्रों का महत्त्व

Answer

1. प्रस्तावना - संसार में नित्य नवीन घटने वाली घटनाओं की जानकारी पाने का सबसे मुख्य साधन समाचार - पत्र ही हैं। कोई भी देश इनकी उपेक्षा नहीं कर सकता। लोकतन्त्रात्मक शासन प्रणाली में समाचार - पत्र शासक और जनता में माध्यम का अर्थात् दुभाषिये का काम करते हैं। इसकी वाणी जनता जनार्दन की वाणी होती है। विभिन्न राष्ट्रों तथा जातियों के उत्थान एवं पतन में समाचार - पत्रों का बहुत बड़ा हाथ रहा है। 

2. समाचार - पत्रों का इतिहास एवं विकास - समाचार - पत्र का प्रचलन इटली के वेनिस नगर में 16वीं शताब्दी में हुआ और इसका प्रचार उत्तरोत्तर बढ़ने लगा। भारत में सन् 1780 में कलकत्ता से सबसे पहला समाचार - पत्र प्रकाशित किया गया जिसका नाम था 'दी बंगाल गैजेट' जिसका सम्पादन जेम्स हिक्की ने किया था। इसके साथ ही यहाँ पर 'समाचार - दर्पण', 'कौमुदी', 'प्रभात', 'उदन्त मार्तण्ड' आदि समाचार - पत्र प्रकाशित हुए। फिर जनता में समाचार - पत्रों की लोकप्रियता बढ़ने लगी और देश के विभिन्न अंचलों से भिन्न - भिन्न भाषाओं में अनेक समाचार - पत्र निकलने लगे। 

भारतवर्ष में जैसे - जैसे मुद्रण - कला का विस्तार हुआ, उसी गति से समाचार - पत्र भी बढ़ते गये। आज यह व्यवसाय अपनी पूर्ण समृद्धि पर है। बड़े और छोटे सभी प्रकार के समाचार - पत्र देश में निकल रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक एवं परिवहन के साधनों के विकास से भी समाचार - पत्रों का तीव्रता से प्रसार होने लगा है। 

3. समाचार - पत्रों से लाभ - देशवासियों की व्यापारिक उन्नति में समाचार - पत्र एक बहुत बड़ा सहायक साधन है। अपनी व्यावसायिक उन्नति के लिए हम किसी भी पत्र में अपना विज्ञापन प्रकाशित करा सकते हैं। पढ़े - लिखे परन्तु बेरोजगार लोग समाचार - पत्रों में अपनी आजीविका ढूँढ़ते हैं। सरकारी तथा गैर - सरकारी नौकरियों के विज्ञापन के लिए चार - पत्रों में आता है। समाचार - पत्रों में वैवाहिक विज्ञापन, खेलकद तथा विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों की सूचनाएँ भी प्रकाशित होती हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय चेतना का प्रसार करने में समाचार - पत्रों का अत्यधिक योगदान रहा है। अतः समाचार - पत्र सभी के लिए लाभदायक हैं। 

4. समाचार - पत्रों से हानियाँ - समाचार - पत्र हमारी पूर्णतया सहायता करते हैं, परन्तु कभी - कभी स्वार्थी और बुरी प्रकृति के प्राणी अपनी दूषित और विषैली विचारधाराओं को समाचार - पत्रों में प्रकाशित करके जनता में घृणा की भावना फैला देते हैं, जिससे राष्ट्र में अराजकता बढ़ जाती है, साम्प्रदायिक उपद्रव होने लगते हैं और एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को शत्रु की दृष्टि से देखने लगता है। अनेक बार भ्रामक विज्ञापन तथा भ्रामक सूचनाएँ भी प्रकाशित हो जाती हैं। इससे सर्वाधिक हानि होती है।

5. उपसंहार - आज स्वतंत्रता का युग है। समाचार - पत्र को स्वतन्त्र अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम माना जाता है। अतः समाचार - पत्रों की निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता जरूरी है। सामाजिक चेतना के परिष्कार की दृष्टि से समाचार - पत्रों का अत्यधिक महत्त्व है।

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