Question
नेताओं के बारे में कवि की क्या राय है?

Answer

कवि प्रेमघन इस देश के नेताओं के चरित्र पर व्यंग्यात्मक वर्णन करते हुए कहते हैं जो व्यक्ति अपने तन के कपड़े यानी ढीली-ढाली धोती नहीं संभाल पाते वे देश को क्या संभाल सकेंगे ?
यहाँ के नेता गरीबों का शोषण करते हैं। वे फिरंगियों के पिच्छलग्गू बन गये हैं ताकि उनका विलासी जीवन व्यतीत होता रहे। इन नेताओं में न तो देशप्रेम की भावना है न ही देशवासियों के हित की चिन्ता। ये देश की स्थिति को सुधारने की कल्पना मात्र ही करते हैं।

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