नील हरित शैवाल को साइनोबैक्टीरिया भी कहते हैं। यह शैवाल 15-53 किग्रा. नाइट्रोजन का प्रति हैक्टेयर धान के खेत में यौगिकीकरण करता है। यह 15-20 प्रतिशत धान की पैदावार को बढ़ता है। यह पादप वृद्धि नियामक पदार्थ जैसे-इन्डोल-3- एसिटिक अम्ल, ऑक्जिन तथा जिब्रलियन्स उत्पन्न करता है। यह प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपनी वृद्धि तथा विकास कर धान की फसल को नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है। इसकी कुछ मुख्य प्रजातियाँ एनाबिना, नोस्टॉक, साइटोनिया, आसीलेटोरिया आदि हैं।