Question
वर्तमान समस्याएँ एवं निराकरण में युवाओं का योगदान

Answer

1. प्रस्तावना - प्रत्येक देश तथा समाज की अपनी - अपनी समस्याएँ होती हैं। कुछ समस्याएँ कुछ काल बाद स्वतः समाप्त हो जाती हैं, तो कुछ का निराकरण करने का प्रयास करने पर भी हल नहीं होती हैं। समस्याएँ जितनी 
अधिक होती हैं, उनसे देश एवं समाज उतना ही अधिक दबा रहता है और प्रगति का मार्ग रुक - सा जाता है। 

2. वर्तमान समस्याएँ - हमारे देश में स्वतन्त्रता - प्राप्ति के साथ ही अनेक समस्याएँ उभरीं। छुआछूत, अशिक्षा, दहेज - प्रथा, जनसंख्या वृद्धि, शोषण - उत्पीड़न, बेरोजगारी, अन्धविश्वास, आर्थिक विषमता आदि अनेक समस्याओं से हमारा देश आक्रान्त है, परन्तु वर्तमान में कुछ समस्याएँ अधिक विकराल रूप धारण कर रही हैं। ऐसी समस्याएँ हैं भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई - वृद्धि, जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक विषमता, स्वार्थपरता आदि। 

आज शासन - तन्त्र से लेकर सामान्य जन - जीवन में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर फैल गया है। बेरोजगारी बढ़ने से युवा - शक्ति अपराधों में प्रवृत्त हो रही है। जनसंख्या - वृद्धि भी एक ज्वलन्त समस्या है, जिससे सुख - सुविधाओं की कमी पड़ रही है। कालाबाजारी, राहजनी, चोरी, धोखेबाजी आदि ऐसी बुरी प्रवृत्तियाँ लगातार बढ़ रही हैं जिनसे आज सारा सामाजिक परिवेश आक्रान्त है।। 

3. समस्याओं से हानि - इन सभी समस्याओं से आज सारा वातावरण दूषित हो गया है। लोगों का आपस विश्वास उठने लगा है। हर कोई स्वार्थ साधने की खातिर दूसरों का अहित कर रहा है। मनुष्य अपना मनोरथ सिद्ध करने के लिए मानवीय मूल्यों को भी भूलता जा रहा है और भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी आदि समस्याओं में लिप्त होकर संवेदना रहित हो रहा है। शोषण एवं उत्पीड़न बढ़ रहा है। नशाखोरी, फैशनपरस्ती एवं अनैतिकता का खूब प्रसार हो रहा है। इन सब बुराइयों से आज हमारा सामाजिक एवं राष्ट्रीय अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है। 

4. समस्याओं के निराकरण में युवाओं का योगदान - वर्तमान काल की समस्याओं के समाधान में युवा - शक्ति अनेक प्रकार से योगदान कर सकती है। युवा - वर्ग बेरोजगारी दूर करने के लिए स्वावलम्बी कार्य कर सकते हैं। वे भ्रष्टाचार करने वालों का विरोध कर जनता का मनोबल उठा सकते हैं। महंगाई पर नियन्त्रण के लिए वे कालाबाजारी एवं कुशासन को समाप्त करने में आगे आ सकते हैं। आशय यह है कि युवा - वर्ग में यदि कुछ करने का जुनून पैदा हो जाये, तो सभी समस्याओं का निराकरण हो सकता है। 

5. उपसंहार - वर्तमान में अनेक समस्याओं से सामाजिक जीवन में अशान्ति व्याप्त है। एक लोकतन्त्रात्मक राष्ट्र . में ऐसी समस्याओं का समाधान करने में युवाओं का विशेष योगदान रह सकता है। वे ही जन - जागरण के द्वारा युवा शक्ति को सामाजिक उन्नयन की चेतना से मण्डित कर सकते हैं।

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