लाखो पतंगे गोले बाँध-बांधकर , इन लैम्पो के चारो और नृत्य कर रहे थे , जगत के यह अदभुत नमूने थे | प्रत्येक पतंगा एक नक्षत्र की भांति अपने मार्ग पर चक्कर काट रहा था | कोई छोटा , कोई बड़ा , दायरा बन रहा था | कोई दाये को, कोई बाये को, कोई आगे को , कोई विपरीत गति में निरंतर चक्कर काटते चले जा रहे थे , कोई किसी से टकराता नहीं |