पादप पुर:स्थापन में कुल छः क्रियाएँ या चरण होते हैं
(i) अर्जन (Procurement) - वांछित जननद्रव्य या किस्म को प्राप्त करने को अर्जन कहते हैं । सभी पादप पुर:स्थापन राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR) नई दिल्ली के माध्यम से होना आवश्यक है।
(ii) संगरोध (Quarantine) - बाहर से आयातित बीजों तथा पादप उत्पादों का रोग, कीट एवं खरपतवारों से मुक्त होना सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को संगरोध कहते हैं।
(iii) सूचीबद्धन (Cataloguing) - ब्यूरो को प्राप्त होने वाले सभी विभेदों (strains) या प्रविष्टियों को एक क्रम संख्या से निर्दिष्ट किया जाता है। इसके साथ ही, प्रत्येक प्रविष्टि की प्रजाति, किस्म, उद्गम (origin), अनुकूलन, अभिलक्षण आदि रिकॉर्ड कर लिये जाते हैं।
(iv) मूल्यांकन (Evaluation) - ब्यूरो द्वारा प्राप्त सभी प्रविष्टियों को ब्यूरो के ईसापुर प्रक्षेत्र तथा अन्य चार केन्द्रों पर उगाया जाता है। इन प्रविष्टियों का उपज तथा अन्य अभिलक्षणों के लिये मूल्यांकन किया जाता है।
(v) गुणन एवं वितरण (Multiplication and distribution) - जब परीक्षणों में किसी प्रविष्टि की उपज तथा अन्य अभिलक्षण प्रचलित उन्नत किस्मों की तुलना में अधिक उत्कृष्ट होते हैं, तो ऐसी प्रविष्टि को नई किस्म के रूप में विमोचित किया जाता है। ऐसी किस्म के बीज का उत्पादन तथा वितरण बीज निगमों द्वारा किया जाता है।