Uttar Pradesh Boardहिन्दी माध्यमकक्षा 10विज्ञाननियंत्रण एवं समन्वय6 Marks
Question
पादपों में समन्वय का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
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Answer
पादपों में समन्वयन सभी जीवों में (पादप व जन्तु दोनों में ही।) जैविक क्रियामों का निमंत्रण व समन्वयन पामा जाता है। जन्तुओं में इसके लिए संवेदी अंग व तंत्रिका तंत्र होता है किन्तु पादपों में न तो तंत्रिका तंत्र होता है और न ही विशेष संवेदी अंगा फिर भी पादपों में उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया देखी जा सकती है। यदि हम छूई-मुई के पौधों की पत्तियों को धीरे से वे हैं तो वे मुड़ना शुरू कर देती हैं। सूरजमुखी के पौधे के फूल सूर्य के साथ-साथ घूमते जाते हैं। जब अंकुरित बीज का नन्हा-सा पौधा वृद्धि करता है, तो उसकी जड़ नीचे की और तथा तना ऊपर की और बढ़ता है। अतः पौधों में होने वाली समन्वयक क्रियाएँ विभिन्न पादप गतियों के रूप में परिलासित होती हैं। ये पादप गतियाँ वृद्धि मुक्त अथवा वृद्धि पर आश्रित हो सकती हैं; जैसे- छुई-मुई की पत्तियों का वृद्धि मुक्त गति है और नन्हें से पौधे की जड़ व तने का नीचे व ऊपर की और बढ़ना वृद्धि पर आश्रित गति है। वृद्धि एक स्थायी एवं अपरिवर्तनीय प्रक्रिया है जिसके कारण जीवों के आकार एवं भार में वृद्धि होती है और नए जीवद्रव्य या निमणि होता है। छुई-मुई में स्पर्श की अनुक्रिया की गति बहुत ग्रीव है। रात और दिन की अनुक्रिया में पुष्पों की गति बहुत मंद होती है। पादय की वृद्धि संबंधी गतियाँ भी मंद होती हैं।
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