पौधशाला की परिभाषा (1) वह सीमित क्षेत्र, जहाँ छोटे-छोटे तथा महँगे बीजों को सघन रूप में बोकर तथा उगे हुए पौधों को प्रारम्भिक अवस्था में सभी सम्भव सुविधाएँ प्रदान कर पौधे तैयार किये जाते हैं, उसे पौधशाला या नर्सरी कहते हैं।
(2) छोटी-छोटी क्यारियों वाला वह क्षेत्र जहाँ अधिक मात्रा में एक साथ बोये गये बीजों से उत्पन्न पौधों की सामूहिक रूप से उस समय तक देखरेख की जाती है, जब तक कि उनको स्थाई स्थान पर स्थानान्तरित नहीं किया जाता, पौधशाला कहलाता है।
पौधशाला का महत्त्व- वर्तमान में वानस्पतिक उत्पादन हेतु पौधशालाओं का बहुत महत्त्व है। पौधशाला में नवजात पौधों की देखरेख उचित ढंग से होती है, जिससे स्वस्थ पौधे तैयार होते हैं और भविष्य में अच्छा उत्पादन मिलता है। वर्तमान में सघन खेती (Intensive Cultivation) छोटी कृषि जोत व कुछ अन्य कारणों से पौधशाला का महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है। पौधशाला का महत्त्व निम्न प्रकार स्पष्ट है-
(1) पौधशाला में पौध तैयार करने में भूमि की बचत होती है।
2) पौधशाला में पौध तैयार करने में बीज कम लगता है।
(3) छोटे व हल्के बीजों की खेत में सीधी बुआई करना कठिन होता है लेकिन पौधशाला में आसानी से बुआई व सुरक्षा कर सकते हैं।
(4) पौधशाला में उगे हुए नवजात व कोमल पौध की सीमित क्षेत्र के कारण देखभाल करना आसान रहता है।
(5) पौधशाला में पौधों की वृद्धि के लिए सभी अनुकूल परिस्थितियाँ आसानी से प्रदान की जा सकती हैं।
(6) बीजों की बुआई नर्सरी में करने से मुख्य खेत की तैयारी के लिए अधिक समय मिल जाता है।
7) पौधशाला में पौध तैयार करने से सघन खेती को बढ़ावा मिलता है।
(8) कम क्षेत्र में पौधों की कीटों, रोगों व प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों से आसानी से सुरक्षा कर सकते हैं।
(9) पौधशाला में पौध तैयार कर खेती करने से उत्पादन व्यय कम होता है जिससे प्रति हैक्टर लाभ बढ़ जाता है।
(10) व्यवसाय के रूप में पौधशाला में सब्जियों, फूलों व फलों की पौध तैयार कर अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।