(1) पीड़कनाशी जो कीटों तथा खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किये जाते हैं, का अधिकांश भाग मृदा में मिल जाता है।
(2) पीड़कनाशी का प्रभावी होना तथा उसके हानिकारक अवशेषों का बुरा प्रभाव उसके मृदा में रहने के समय पर निर्भर करता है।
(3) उदाहरण-डी.डी.टी. का कृषि योग्य मृदा में 3 साल तक स्थायित्व रहता है जबकि ऑरगेनो फॉस्फेट और कार्बामेट कीटनाशी कुछ दिन या कुछ माह तक ही स्थायी रहते हैं।
(4) कुछ कौटनाशकों का मृदा में स्थायित्व निम्न प्रकार है- हैप्टाक्लोर 9 वर्ष, एल्ड्रिन तथा डाइएल्ड्रिन 9 वर्ष, डी. डी.टी. 10 वर्ष, बी.एच.सी. 11 वर्ष, क्लोरोडेन 12 वर्ष, डाइयूरॉन 19 माह, एट्राजिन 18 माह, 2-4 डी 14 से 30 दिन।
(5) फसलों को उगाने से, रिसाव द्वारा तथा कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के द्वारा पीड़कनाशी का स्तर धीरे-धीरे मृदा में कम होता जाता है।