Question
पराधीन सपनेहूँ सुख नाहीं।
पराधीनता की पीड़ा से छुटकारा पाने के लिए ही महात्मा गांधी, पं. नेहरू, सरदार पटेल जैसे नेता आंदोलन करते हैं, लाठियाँ खाते हैं और जेल जाते हैं। अपनी मातृभूमि को पराधीनता के नरक से मुक्त करके स्वतंत्रता के स्वर्ग में ले जाने के लिए ही भगतसिंह, बिस्मिल, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे व्यक्ति फांसी के फंदे पर लटक गए हैं। व्यक्ति का विकास स्वतंत्रता में ही होता है। स्वंतत्र राष्ट्र ही गौरवपूर्ण ढंग से जी सकता है। इसलिए पराधीनता में सुख पाने की आशा करना व्यर्थ है।
Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.