प्रायद्वीपीय नदियाँ प्रायद्वीपीय नदियों को उनके अपवाह क्षेत्र के आधार पर दो भागों में बाँटा जा सकता है-
I. पश्चिम में बहने वाली अथवा अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ-अरब सागर में गिरने वाली नदियों में नर्मदा व तापी नदी मुख्य हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-
(1) नर्मदा द्रोणी-नर्मदा नदी का उद्गम मध्यप्रदेश में अमरकंटक पहाड़ी के निकट है। वहाँ से निकलकर यह भ्रंश घाटी में प्रवाहित होती है। यह नदी अपने अपवाह क्षेत्र में अनेक दर्शनीय स्थलों का निर्माण करती है। जबलपुर के निकट संगमरमर की चट्टानों में यह गहरे गार्ज से बहती है तथा आगे तीव्र ढाल से गिरकर 'धुंआधार प्रपात' बनाती है। इसकी सभी सहायक नदियाँ छोटी हैं। ये नर्मदा से मिलकर जालीनुमा प्रतिरूप का निर्माण करती हैं।
(2) तापी द्रोणी-यह मध्यप्रदेश के बेतुल जिले में सतपुडा की श्रृंखलाओं से निकलती है। यह भी भ्रंश घाटी ती है। इसकी लम्बाई बहत कम है। तापी की द्रोणी मध्यप्रदेश, गजरात तथा महाराष्ट्र राज्यों में है। पश्चिम की ओर बहने वाली अन्य नदियाँ साबरमती, माही, भारत-पुजा तथा पेरियार हैं।
II. पूर्व की ओर बहने वाली अथवा बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ-इनमें मुख्य नदियाँ गोदावरी, महानदी, कृष्णा तथा कावेरी हैं।
(1) गोदावरी-यह सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिमी घाट की ढालों से निकलती है। यह लगभग 1500 कि.मी. लम्बी है। इसका अपवाह क्षेत्र प्रायद्वीपीय नदियों में सबसे बड़ा है। पूर्णा, वर्धा, प्रान्हिता, मांजरा, वेनगंगा एवं पेनगंगा इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। इसकी लम्बाई एवं बड़े अपवाह क्षेत्र के कारण इसे 'दक्षिण गंगा' भी कहा जाता है। यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उड़ीसा एवं आंध्र प्रदेश से होकर बहती है।
(2) महानदी-महानदी छत्तीसगढ़ की उच्च भूमि से निकलती है। इसकी लम्बाई 860 कि.मी. है। यह महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखण्ड तथा उड़ीसा में होकर बहती है।
(3) कृष्णा नदी-यह पश्चिमी घाट में महाबलेश्वर के निकट एक झरने से निकलती है। यह 1400 कि.मी. लम्बी नदी है । तुंगभद्रा, कोयना, घाटप्रभा, मुसी तथा भीमा इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। यह महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश से होकर बहती है।
(4) कावेरी नदी-यह पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरी श्रेणी से निकलती है। अमरावती, भवानी, हेमावती तथा काबिनी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। यह कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु से होकर बहती है। यह 760 कि.मी. लम्बी है। दामोदर, ब्रह्मनी, वैतरणी तथा सुवर्ण रेखा पूर्व की ओर बहने वाली कुछ अन्य नदियाँ हैं।