Question
प्रेम रूपी धागे को तोड़ना क्यों नहीं चाहिए?

Answer

प्रेम रूपी धागे को तोड़ना नहीं चाहिए क्योंकि यदि संबंधों में प्रेम रूपी धागा एक बार टूट जाता है तो मन में गाँठ बन जाती है अर्थात संबंध ठीक हो जाने पर भी मन-मुटाव रह ही जाता है।

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बुझा दीप झाँसी का तब डहलौज़ी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फौरन फ़ौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया,
अश्रपूर्ण रानी ने देखा
झाँसी हुई बिरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥
QUESTION:
Q.1. झाँसी का दीप बुझने से कवयित्री का क्या आशय है?
(A) राज्य में अंधकार छा गया (B) राज्य पराधीन हो गया (C) लक्ष्मीबाई की मृत्यु (D) युद्ध में हार
Q.2. डहलौज़ी मन-ही-मन क्यों प्रसन्न हुआ?
(A) डहलौज़ी को अब अवसर मिल गया कि वह झाँसी राज्य को अंग्रेज़ी राज्य में मिला सकता था। (B) डहलौजी झाँसी पर हमला करना चाहता था। (C) वह लावारिस राज्य का वारिस बनना चाहता था। (D) सभी कथन सत्य हैं
पाठ से पता करके लिखो कि लेखिका को चश्मा क्यों लगाना पड़ा ? चश्मा लगाने पर उनके चचेरे भाई उन्हें क्या कहकर चिढ़ाते थे?
यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
चेतक को देख दुश्मन क्यों दंग रह गए ?
कविता की दूसरी पंक्ति में भारत को 'बूढ़ा' कहकर और उसमें 'नयी जवानी' आने की बात कहकर सुभद्रा कुमारी चौहान क्या बताना चाहती हैं?
यदि आपको टाइम-मशीन मिल जाए तो आप उसमें बैठकर कौन-से समय में और कौन-से स्थान पर जाना चाहेंगे? क्यों?
कविता में कवि ने किन दो महाकाव्यों के किन-किन पात्रों का उल्लेख किया है और भारतीय संस्कृति में उनका क्या महत्व है?
कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब आप कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे, लिखिए। इस काम में आप थोड़ा-बहुत अपनी कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।
क्या यह संभव है कि भला कोई जंगल में घंटाभर घूमे और फिर भी कोई विशेष चीज़ न देखे मुझे जिसे कुछ भी दिखाई नहीं देता-सैकड़ों रोचक चीज़ मिलती हैं, जिन्हें मैं छूकर पहचान लेती हूँ। मैं भोज-पत्र के पेड़ की चिकनी छाल और चीड़ की खुरदरी छाल को स्पर्श से पहचान लेती हूँ। वसंत के दौरान मैं टहनियों में नई कलियाँ खोजती हूँ। मुझे फूलों की पंखुड़ियों की मखमली सतह छूने और उनकी घुमावदार बनावट महसूस करने में अपार आनंद मिलता है। इस दौरान मुझे प्रकृति के जादू का कुछ अहसास होता है। कभी, जब मैं खुशनसीब होती हूँ, तो टहनी पर हाथ रखते ही किसी चिड़िया के मधुर स्वर कानों में गूंजने लगते हैं। अपनी अंगुलियों के बीच झरने के पानी को बहते हुए महसूस कर मैं आनंदित हो उठती हूँ।
QUESTION:
Q.1. लेखिका चीज़ों को कैसे पहचान लेती है।
(A) देखकर (B) सुनकर (C) छूकर (D) सूंघकर
Q.2. भोज-पत्र की छाल कैसी होती है?
(A) खुरदरी (B) सख्त (C) टेढ़ी-मेढ़ी (D) चिकनी
लेखिका अपने बचपन में कौन-कौन सी चीजें मजा ले-लेकर खाती थीं? उनमें से प्रमुख फलों के नाम लिखो।