(1) पर्यावरणीय प्रदूषण मनुष्यों की गतिविधियों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पन्न उप-उत्पाद है जो पर्यावरण में पूर्ण रूप से या अधिकतम प्रतिकूल परिवर्तन उत्पन्न करता है, ऊर्जा स्वरूपों, विकिरण स्तरों, रासायनिक तथा भौतिक संगठन तथा जीवों की संख्या में परिवर्तन को प्रभावित करता है।
(2) अतः जिस क्रिया से हवा, जल, मिट्टी तथा वहाँ के संसाधनों के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में किसी अवांछनीय परिवर्तन से जैव जगत् तथा सम्पूर्ण परिवेश पर हानिकारक प्रभाव पहुँचता है, उसे प्रदूषण कहते हैं।