पर्यावरणीय निम्नीकरण से अभिप्राय पर्यावरण के विभिन्न घटकों; यथा-मृदा, वायु, जल तथा जैवविविधता के वास्तविक गुणों एवं विशेषताओं में होने वाले अवांछनीय परिवर्तन से है। प्रकृति में सामान्य परिस्थितियों में निम्नीकरण एवं निर्माणकारी प्रक्रियाएँ एक चक्रीय रूप में घटित होती हैं; एवं इनमें सन्तुलन की स्थिति बनी रहती है। परन्तु वर्तमान में इस तकनीकी प्रधान एवं वैश्वीकृत युग में मानवीय गतिविधियों के कारण प्राकृतिक संसाधनों के अतिदोहन से यह चक्र असन्तुलित हो रहा है। भूमि उपयोग प्रतिरूप में परिवर्तन,औद्योगीकरण एवं नगरीकरण की तीव्र दर तथा उपभोक्तावादी संस्कृति ने निम्नीकरण की दर को तीव्र कर दिया है जिसका परिणाम पर्यावरण असन्तुलन के रूप में सामने आ रहा है।