दाह (Burn)- जब पशु आवास में आग लग जाने से गर्म पानी से या रासायनिक घोल (तेजाब) से जल जाता है। जिससे फफोले पड़ जाते हैं एवं फफोलों के फूटने पर उसमें से द्रव्य निकलता है एवं घाव हो जाता है।
उपचार-जले हुए भाग पर चूने का पानी, अलसी का तेल (यदि अलसी का तेल उपलब्ध नहीं हो तो मीठा तेल) बराबर मात्रा में मिलाकर लगाने से काफी आराम मिलता है। यदि घाव में मवाद या तरल सा पदार्थ निकलता हो तो लाल दवा के हल्के गर्म घोल से साफ करके जिंक ऑक्साइड दिन में दो-तीन बार लगाना चाहिए। सिरका, शहद या पैराफीन लगाने से भी दर्द कम होता है। तेजाब से जल जाने पर एक प्रतिशत कपड़े धोने का सोडे का घोल लगाना चाहिए। यदि पशु के शरीर का काफी भाग जल गया हो तो तुरंत पशु चिकित्सक से इलाज करवाना चाहिए।
मोच (Sprain)- यह आमतौर पर पशु के फिसलने से, कूदने से, पशु के आपस में लड़ने से चोट लगने से मोच आती है। मोच साधारणतया शरीर के जोड़ों पर विशेषकर टांग में आती है। इसमें मांसपेशियाँ, स्नायु या टेन्डन पर चोट आती है या ये अपने स्थान पर से हट जाते हैं। मोच के स्थान पर सूजन आती है जो गर्म एवं दर्द युक्त होती है। यदि मोच पशु के टांगों में है तो पशु लंगड़ाकर चलता है।
उपचार-यदि मोच ताजी एवं गर्म है तो उस जगह पर ठंडा पानी डालें या बर्फ से सेक करना चाहिए। पुरानी मोच में नमक या बोरिक एसिड मिले गुनगुने पानी से सेक करना चाहिए। पशु को सूजन एवं दर्द कम करने वाली दवा लगानी चाहिए।