राष्ट्र-निर्माण का आदर्श यह कामना करता है कि राज्य का संविधान सर्वमान्य हो, देश का राजनीतिक एकीकरण हो जाए, ताकि किसी क्षेत्र में देशद्रोही या विच्छेदवादी शक्तियाँ न पनप सकें, सभी को सामाजिक व आर्थिक न्याय के वरदान सुनिश्चित हों, शिक्षा प्रणाली व कानूनी व्यवस्था राष्ट्र की आवश्यकताओं व आकांक्षाओं पर आधारित हो तथा राज्य ऐसी विदेश नीति अपनाए जो उसके राष्ट्रीय हित को सुरक्षित व संवर्द्धित करे।
अमरीकी लेखक कार्ल डायश (Karl Deutsch) कहते हैं कि जिस प्रकार ईंट, पत्थर, लकड़ी, लोहे, सीमेण्ट आदि से कोई भवन बनाया जाता है, उसी प्रकार राष्ट्र-निर्माण होता है जिसके पीछे उसके महान् निर्माताओं की इच्छा शक्ति या उनका दृढ़ संकल्प देखा जा सकता है।