गोलू ने एक पटाखे को बुझा हुआ समझकर छोड़ दिया था। कुछ देर बाद उसमें से चिनगारियाँ निकलने लगीं। गोलू की पीठ पटाखे की तरफ थी। रेशमा ने यह देखा और चिल्लाकर गोलू को हट जाने के लिए कहा, पर शोरगुल के कारण उसे सुनाई नहीं दिया। रेशमा जल्दी-जल्दी अपनी कुर्सी को ढकेलती हुई गोलू के पास पहुंची और उसे जोर से धक्का मारकर खुद आगे निकल गई। उसी समय पटाखा जोर से फूटा। इस प्रकार गोलू को पटाखे से बचाने के लिए रेशमा ने उसे धक्का मारा।
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