Question
शीतल वाणी में आग के होने का क्या अभिप्राय है?

Answer

शीतल वाणी में आग होने' का आशय यह है कि कवि का स्वभाव और स्वर भले ही कोमल हैं, परन्तु उसके हृदय तथा विचारों में विद्रोह एवं जोश की कमी नहीं है। वह हृदयगत जोश से प्रेम-रहित संसार को अपनी शीतल वाणी में दुत्कारता है, फिर भी अपना होश नहीं खोता है। इस तरह कवि अपने शीतल उद्गारों के पीछे हृदय के जोश, बल, शक्ति की बात कहते हैं।

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