मानव स्वभाव में सदैव यह प्रवृत्ति पायी जाती है कि वह यदा-कदा कुछ-न-कुछ जानने का प्रयास अवश्य करता है। दिन-प्रतिदिन के कार्यों को करने के नये-नये तरीके ढूँढ़ना, उनसे सम्बन्धित चिन्तन करना एवं उपाय खोजना ही सर्जनात्मकता कहलाती है। ऐसे सैकड़ों व्यक्ति हैं जिनकी सर्जनात्मकता क्षमता के कारण ही वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति को नवीन आयाम प्राप्त हुए हैं। आज संगीत, चित्रकारी, काव्य, कला, शिक्षा, अंतरिक्ष यात्रा आदि का जो आनन्द प्राप्त करते हैं वह सब सर्जनात्मक क्षमता का ही परिणाम है।