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संधारित्रों के चार उपयोग लिखिए

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स्वप्रयत्न

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दो बिन्दु आवेश एक-दूसरे से d दूरी पर रखे हैं। इनके कारण किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य है। परन्तु बिन्दु इन आवेशों के बीच में नहीं है बल्कि उनको जोड़ने वाली रेखा पर है, ऐसा होने के लिए दो आवश्यक शर्तें लिखिए।
नैज अर्द्धचालक किसे कहते है?
क्लासिकी रूप में किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किसी भी कक्षा में हो सकता है। तब प्रारूपी परमाण्वीय साइज किससे निर्धारित होता है? परमाणु अपने प्ररूपी साइज की अपेक्षा दस हजार गुना बड़ा क्यों नहीं है? इस प्रश्न ने बोर को अपने प्रसिद्ध परमाणु मॉडल, जो अपने पाठ्य-पुस्तक में पढ़ा है, तक पहुँचने से पहले बहुत उलझन में डाला था। अपनी खोज से पूर्व उन्होंने क्या किया होगा, इसका अनुकरण करने के लिए हम मूल नियतांकों की प्रकृति के साथ निम्न गतिविधि करके देखें कि क्या हमें लम्बाई की विमा वाली कोई राशि प्राप्त होती है, जिसका साइज, लगभग परमाणु के ज्ञात साइज $\left(\sim 10^{-10} \mathrm{~m}\right)$के बराबर है।
  1. मूल नियतांकों e, me, और c से लम्बाई की विमा वाली राशि की रचना कीजिए। उसका संख्यात्मक मान भी निर्धारित कीजिए।
  2. आप पायेंगे कि (a) में प्राप्त लम्बाई परमाण्वीय विमाओं के परिमाण की कोटि से काफी छोटी है। इसके अतिरिक्त इसमें c सम्मिलित है। परन्तु परमाणुओं की ऊर्जा अधिकतर अनापेक्षिकीय क्षेत्र (nonrelativistic domain) में है जहाँ c की कोई अपेक्षित भूमिका नहीं है। इसी तर्क नले बोर को c का परित्याग कर सही परमाण्वीय साइज को प्राप्त करने के लिए 'कुछ अन्य' देखने के लिए प्रेरित किया। इस समय प्लांक नियतांक h का कहीं और पहले ही आविर्भाव हो चुका था। बोर की सूक्ष्मदृष्टि ने पहचाना कि h, me, और e के प्रयोग से ही सही परमाणु साइज प्राप्त होगा। अतः h, me} और e से ही लम्बाई की विमा वाली किसी राशि की रचना कीजिए और पुष्टि कीजिए कि इसका संख्यात्मक मान, वास्तव में सही परिमाण की कोटि का है।
$10 \ cm$ त्रिज्या की किसी कुंडली जिसमें पास$-$पास सटे $100$ फेरे हैं, में $3.2\ A$ विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है।
  1. कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र कितना है?
  2. इस कुंडली का चुंबकीय आघूर्ण क्या है?
    यह कुंडली ऊर्ध्वाधर तल में रखी है तथा किसी क्षैतिज अक्ष जो उसके व्यास से संरेखित है, के परित: घूर्णन करने के लिए स्वतंत्र है। एक $2T$ का एकसमान चुंबकीय क्षेत्र क्षैतिज दिशा में है जो इस प्रकार है कि आरंभ में कुंडली का अक्ष चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में है। चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में कुंडली $90^\circ$ के कोण पर घूर्णन कर जाती है।
  3. आरंभिक तथा अंतिम स्थिति में कुंडली पर बल आघूर्ण के परिमाण क्या हैं?
  4. $90^\circ$ पर घूर्णन करने के पश्चात कुंडली द्वारा अर्जित कोणीय चाल कितनी है? कुंठली का जड़त्व आघूर्ण $ 0.1 \ kg\  m^2$ है।
एक इलेक्ट्रॉन, एक विद्युत् क्षेत्र में उच्च विभव की ओर गति करेगा या निम्न विभव की ओर।
दो गोले A व B जिनकी त्रिज्याएँ क्रमशः a तथा b हों, समान विभव पर हैं। A व B पर पृष्ठीय आवेश घनत्यों का अनुपात कितना होगा?
किसी माध्यम का अपवर्तनांक कौन-से कारकों पर निर्भर करता है?
किसी प्रत्यावर्ती परिपथ में आरोपित वोल्टता 220 V है। यदि $R =8 \Omega, X _{ L }= X _{ C }=6 \Omega$ है' तो निम्न का मान लिखिए-
(a) वोल्टता का वर्ग माध्य मूल (rms) मान
(b) परिपथ की प्रतिबाधा।
एक धातु का कार्य फलन 1.4 eV है। किस ऊर्जा वाले आपतित प्रकाष से दी गई धातु तल से कोई फोटो इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन नहीं होगा ?
मरीचिका क्या है ?