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नैज अर्द्धचालक किसे कहते है?

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स्वप्रयत्न

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आवेश और द्रव्यमान में दो अन्तर लिखिए।
द्रव्यमान क्षति किसे कहते है ? प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा का द्रव्यमान संख्या के फलन के रूप में ग्राफ खींचिये और इस ग्राफ से दो निष्कर्ष लिखिए।
  1. एक समोर्जी इलेक्ट्रॉन किरण-पुंज जिसमें इलेक्ट्रॉन की चाल $5.20 \times10^{6} \mathrm{~ms}^{-1}$ है, पर एक चुम्बकीय क्षेत्र 1.30$ \times 10^{-4} \mathrm{~T}$किरण-पुंज की चाल के लम्बवत लगाया जाता है। किरण-पुंज द्वारा आरेखित वृत्त की त्रिज्या कितनी होगी, यदि इलेक्ट्रॉन के $e / m$ का मान 1.76$ \times 10^{11} \mathrm{C}\mathrm{kg}^{-1}$है।
  2. क्या जिस सूत्र को (a) में उपयोग में लाया गया है वह यहाँ भी एक 20 MeV इलेक्ट्रॉन किरण-पुंज की त्रिज्या परिकलित करने के लिए युक्तिपरक है? यदि नहीं तो किस प्रकार इसमें संशोधन किया जा सकता है?
प्रकाश-विद्युत् प्रभाव के एक प्रयोग में प्रकाश आवृत्ति के विरुद्ध अंतक वोल्टता की ढलान 4.12$ \times 10^{-15} \mathrm{Vs}$ प्राप्त होती है। प्लांक स्थिरांक का मान परिकलित कीजिए।

धातु का आवेशित गोला A नाइलॉन के धागे से निलंबित है। विद्युतरोधी हत्थी द्वारा किसी अन्य धातु के आवेशित गोले B को A के इतने निकट लाया जाता है कि चित्र (a) में दर्शाए अनुसार इनके केंद्रों के बीच की दूरी 10 cm है। गोले A के परिणामी प्रतिकर्षण को नोट किया जाता है (उदाहरणार्थ- गोले पर चमकीला प्रकाश पुंज डालकर तथा अंशांकित पर्दे पर बनी इसकी छाया का विक्षेपण मापकर)। A तथा B गोलों को चित्र (b) में दर्शाए अनुसार, क्रमश: अनावेशित गोलों C तथा D से स्पर्श कराया जाता है। तत्पश्चात चित्र (c) में दर्शाए अनुसार C तथा D को हटाकर B को A के इतना निकट लाया जाता है कि इनके केंद्रों के बीच की दूरी 5.0 cm हो जाती है। कूलॉम नियम के अनुसार A का कितना अपेक्षित प्रतिकर्षण है? गोले A तथा C एवं गोले B तथा D के साइज़ सर्वसम हैं। A तथा B के केंद्रों के पृथकन की तुलना में इनके साइज्ञों की उपेक्षा कीजिए।
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ओम का नियम क्या है? इस नियम की दो सीमाएँ लिखिए।
$(a)$ आवेश $4 \times 10^{-7}C$ के कारण इससे $9\ cm$ दूरी पर स्थित किसी बिंदु $P$ पर विभव परिकलित कीजिए।
$(b)$ अब, आवेश $2 \times 10^{-9} C$ को अनंत से बिंदु $P$ तक लाने में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए। क्या उत्तर जिस पथ के अनुदिश आवेश कोको लाया गया है उस पर निर्भर करता है?
एक आवेशित कण अपनी माध्य साम्यावस्था के दोनों ओर 109 Hz आवृत्ति से दोलन करता है। दोलक द्वारा जनित वैद्युत चुम्बकीय तरंगों की आवृत्ति कितनी है?
एक समतल वैद्युतचुम्बकीय तरंग निर्वात में z-अक्ष के अनुदिश चल रही है। इसके विद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के सदिश की दिशा के बारे में आप क्या कहेंगे? यदि तरंग की आवृत्ति 30 MHz हो तो उसकी तरंगदैर्घ्य कितनी होगी?