स्थायी एवं कार्यशील पूँजी में अन्तर-
आवश्यकता-स्थायी पूँजी की आवश्यकता स्थायी सम्पत्तियों जैसे भूमि, भवन, मशीन आदि को खरीदने के लिए होती है, जबकि कार्यशील पूंजी की आवश्यकता चालू सम्पत्तियों जैसे माल, देनदार, प्राप्य बिल, रोकड़ आदि रखने तथा दैनिक व्ययों के भुगतान के लिए होती है।
प्रकृति-स्थायी पूँजी की प्रकृति स्थिर रहने की होती है अर्थात् इसमें जल्दी-जल्दी परिवर्तन नहीं होता है, जबकि कार्यशील पूँजी की प्रकृति अस्थिर होती है अर्थात् इसमें जल्दी-जल्दी परिवर्तन होता रहता है।
स्त्रोत-स्थायी पूँजी दीर्घकालीन स्रोतों से प्राप्त की जाती है, जबकि कार्यशील पूँजी दीर्घकालीन एवं अल्पकालीन दोनों साधनों से प्राप्त होती है।
आशय-स्थायी पूँजी से आशय दीर्घकालीन सम्पत्तियों में निवेश से है, जबकि कार्यशील पूँजी से आशय चालू सम्पत्तियों में निवेश किये जाने से है।