Question
स्वदेशी कविता का मूल भाव लिखें।

Answer

'स्वदेशी' कविता का मूल भाव है भारत और भारतीय तथा भारतीय भाषा के प्रति प्रेम जागृत करना। 'स्वदेशी' कविता की रचना उस समय हुई थी जब देश परतंत्र था। उन दिनों 'स्वदेशी' शब्द ही राष्ट्रीयता एवं नवजागरण का प्रतीक था। स्वभावतः 'स्वदेशी' के दोहों की रचना के पीछे देश में फैले कुविचारों, रीतियों, नीतियों आदि को दूर कर लोगों में आत्म-सम्मान भरना एवं राष्ट्रीयता की भावना जागृत करना था। इसलिए कवि 'प्रेमघन' ने राष्ट्रीय स्वाधीनता की चेतना को अपना लक्ष्य माना तथा सामंतवाद एवं साम्राज्यवाद का विरोध किया।

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