उत्पादन-उत्पादन प्रक्रिया के अन्तर्गत विभिन्न आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन किया जाता है, जिससे लोगों की आवश्यकताओं को संतुष्ट किया जा सके।
उत्पादन के साधन-किसी वस्तु या सेवा का उत्पादन करने हेतु कई साधनों की आवश्यकता पड़ती है। मुख्य रूप से उत्पादन के साधनों को निम्न चार भागों में बाँटा जा सकता है-
(1) भूमि-किसी भी वस्तु या सेवा का उत्पादन करने हेतु भूमि सबसे महत्त्वपूर्ण साधन है। बिना भूमि के किसी भी वस्तु का उत्पादन करना संभव नहीं है। इसके अन्तर्गत भूमि व अन्य प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल, वन, खनिज आदि को भी सम्मिलित किया जाता है। भूमि उत्पादन का स्थिर साधन है।
(2) श्रम-श्रम उत्पादन का सक्रिय साधन है। उत्पादन करने हेतु श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। उत्पादन प्रक्रिया में कुशल एवं अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है।
(3) भौतिक पूँजी-पूँजी के बिना किसी भी वस्तु या सेवा का उत्पादन संभव नहीं है । भौतिक पूँजी को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-स्थायी पूँजी तथा कार्यशील पूँजी। स्थायी भौतिक पूँजी के अन्तर्गत वे मदें शामिल हैं जो कई वर्षों तक चलती हैं, जैसे-औजार, मशीनें, भवन इत्यादि। कार्यशील पूंजी के अन्तर्गत उत्पादन हेतु आवश्यक कच्चे माल एवं नकद को शामिल किया जाता है।
(4) मानव पूँजी अथवा साहसी-उत्पादन का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन साहसी है जो उत्पादन के अन्य साधनों भूमि, श्रम एवं भौतिक पूँजी को एकत्रित कर उत्पादन करते हैं। अतः उत्पादन करने के लिए भूमि, श्रम और भौतिक पूँजी को एक साथ करने योग्य बनाने के लिए ज्ञान और उद्यम की आवश्यकता पड़ती है, इसे मानवीय पूँजी कहा जाता है।