(1) वायुमण्डल में विभिन्न प्रकार की गैसें सामान्य अवस्था में एक निश्चित अनुपात में पायी जाती है। सामान्यतः वायु में नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21%, कार्बन डाई-ऑक्साइड 0.3%, तथा शेष निष्क्रिय गैसें व जल वाष्य होती है।
(2) इन गैसों का जीवधारियों तथा वायुमण्डल के मध्य चक्रीयकरण होता रहता है तथा इस चक्रीयकरण प्रक्रिया के परिणामस्वरूप इन गैसों का अनुपात वायुमण्डल में स्थायी रूप से बना रहता है।
(3) जब वायु में अवांछनीय तत्व प्रवेश करते हैं तो वायु में विद्यमान गैसों का मौलिक अनुपात तथा संतुलन बिगड़ जाता है। इस स्थिति को ही वायु प्रदूषण कहा जाता है।
(4) वास्तव में वायु प्रदूषण का अर्थ है हवा में धूल और कार्बन के महीन कणों तथा नुकसान पहुँचाने वाली गैसों का एक सीमा से अधिक हो जाना।
(5) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा तथा हवा में घुले हुए वे महीन कण जो नग्न आँखों से दिखाई नहीं देते, उन्हें पी-एम 2.5 कहते हैं।
(6) विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय किये गये मानदण्ड से इनका अधिक हो जाना ही वायु प्रदूषण है।