विनिर्माण उद्योगों को आर्थिक विकास की रीढ़ माना जाता है। इनके महत्व को निम्नांकित बिन्दुओं से समझा जा सकता है- 1. विनिर्माण उद्योग, कृषि के आधुनिकीकरण को संभव बनाता है। साथ ही यह द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रकों में रोजगार उपलब्ध कराता है जिससे कृषि पर निर्भरता एवं दबाव को कम किया जा सकता है। 2. औद्योगिक विकास बेरोजगारी तथा गरीबी उन्मूलन की अनिवार्य शर्त है। भारत में सार्वजनिक तथा सार्वजनिक-निजी (संयुक्त) क्षेत्र में लगे उद्योग लोक-कल्याण को प्राथमिकता देते हैं। जनजातीय एवं पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना का उद्देश्य क्षेत्रीय असमानतामों को कम करना है। 3. विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात एक ओर वाणिज्य-व्यापार को प्रोत्साहित करता है तो दूसरी ओर विदेशी मुद्रा का प्रवाह देश में होता है। 4. उन देशों का विकास तीव्रता से हुआ है जो कच्चे माल से अधिक मूल्यवान वस्तुओं का निर्माण करते हैं। भारत का विकास तीव्र तथा विविध औधोगिक विकास में निहित है।
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