सुदृढ़ वित्तीय नियोजन की आवश्यकता अथवा महत्त्व
किसी भी व्यावसायिक संस्था के समग्र नियोजन का वित्तीय नियोजन एक महत्त्वपूर्ण अंग है। इसका लक्ष्य कम्पनी कोष की उपलब्धता के उपलब्ध स्रोत के सम्बन्ध में अनिश्चितता का सामना करने के योग्य बनाना है। यह संगठन के सुगम संचालन में सहायक होता है। इसके द्वारा ही संस्था के वित्तीय साधनों का अनुकूलतम उपयोग सम्भव होता है तथा संस्था के विकास एवं विस्तार की योजनाओं को प्रभावी बनाया जा सकता है। यथार्थ में प्रत्येक व्यावसायिक इकाई की सफलता के लिए सुदृढ़ वित्तीय नियोजन का होना आवश्यक है। सुदृढ़ वित्तीय नियोजन की आवश्यकता एवं महत्त्व के अग्रलिखित कारण गिनाये जा सकते हैं-
1. संस्था को भविष्य के लिए सुदृढ़ बनानावित्तीय नियोजन व्यावसायिक संस्था को भविष्य की परेशानियों का सामना करने के लिए सुदृढ़ बनाता है। उदाहरण के लिए, एक कम्पनी की बिक्री में 20% की वृद्धि का अनुमान लगाया जाता है। लेकिन यह भी सम्भव हो सकता है कि यह वृद्धि 10 या 30 प्रतिशत हो। बहुत से व्ययों की मदें इन तीनों परिस्थितियों में भिन्न होंगी। ब्लू-प्रिंट बनाकर प्रबन्ध यह निश्चित कर सकता है कि इन तीनों परिस्थितियों में क्या किया जाना चाहिए। स्थानापन्न वित्तीय नियोजनों की इस तरह की तैयारी कुछ विभिन्न परिस्थितियों में स्पष्ट रूप में व्यवसाय के सुगम संचालन में सहायता प्रदान करती है।
2. आकस्मिक परेशानियों से बचने में सहायता करना-वित्तीय नियोजन आकस्मिक परेशानियों व विस्मयों से बचने में सहायता करता है तथा यह भविष्य निर्माण में भी सहायक होता है।
3. व्यावसायिक कार्यों में सामंजस्य स्थापित करना-वित्तीय नियोजन संस्था के विभिन्न व्यावसायिक कार्यों में सामंजस्य स्थापित करने में सहायता करता है।
4. अपव्यय, पुनरावृत्ति तथा नियोजन अन्तराल को कम करना-वित्तीय प्रबन्धन में कार्य की विस्तृत योजना तैयार करके अपव्यय को कम किया जा सकता है तथा क्रियाओं की पुनरावृत्ति तथा नियोजन में अन्तराल को भी कम किया जा सकता है।
5. वास्तविक निष्पादन का मूल्यांकन-वित्तीय नियोजन विभिन्न व्यावसायिक खण्डों के उद्देश्यों की व्याख्या करके वास्तविक निष्पादन का आसानी से मूल्यांकन करता है।
6. व्यवसाय का कुशल संचालन-व्यवसाय के प्रवर्तन, स्थापना सम्पत्तियाँ व सामग्री के क्रय तथा माल के निर्माण आदि सभी क्रियाओं में वित्त की आवश्यकता होती है। किन्तु इन.सभी कार्यों के लिए समय पर धन उपलब्ध कराना कुशल वित्तीय नियोजन पर ही निर्भर करता है।
7. न्यूनतम मूल्य पर पूँजी की उपलब्धता-सुदृढ़ वित्तीय नियोजन के द्वारा व्यावसायिक संस्था के लिए न्यूनतम लागत पर वित्त की अनुकूलतम व्यवस्था की जा सकती है।
8. पूँजी की सुरक्षा-वित्तीय नियोजन से संस्था को अपनी पूँजी की सुरक्षा करने में बहुत ही सहायता मिलती है।
वित्तीय नियोजन द्वारा अप्रचलन, बदलती हुई माँग व फैशन, प्रौद्योगिकी सुधार, अनुत्पादक विनियोजन आदि की जोखिमों से व्यवसाय को बचाया जा सकता है।
9. व्यवसाय का विकास एवं विस्तार-सुदृढ़ वित्तीय नियोजन से व्यवसाय के विकास एवं विस्तार के समय वित्तीय कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता
10. पर्याप्त तरलता-सुदृढ़ वित्तीय नियोजन से व्यवसाय में पर्याप्त तरल कोष बने रहते हैं तथा अति व्यापार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती है । व्यवसाय अपनी देनदारियों के भुगतान में सक्षम रहता है।
11. उचितं प्रत्याय-सुदृढ़ वित्तीय नियोजन से संस्था के कार्य रुकते नहीं हैं तथा वित्तीय साधनों का भी पूर्ण उपयोग सम्भव होता है। फलतः विनियोजित पूँजी का उचित प्रतिफल प्राप्त होता है।
12. लागत नियन्त्रण एवं संचालन में मितव्ययिता-सुदृढ़ वित्तीय नियोजन के द्वारा संस्था के सभी कार्यों की लागतों को पूर्व निर्धारित प्रमापित लागतों की सीमा में रख कर नियन्त्रित किया जा सकता है। वित्तीय नियोजन के द्वारा अपव्यय को रोकना भी आसान हो जाता है।
13. संचालन क्रियाओं में मितव्ययिता-सुदृढ़ वित्तीय नियोजन द्वारा अविवेकपूर्ण कार्यों, अपव्यय तथा अलाभप्रद क्रियाओं को रोककर व्यवसाय की प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सकता है।