आर्थिक विकास के लिए जो संस्थाएँ वित्त की व्यवस्था कृषि, उद्यमी और व्यवसायों के लिए उपलब्ध कराती हैं, वित्तीय संस्थाएँ कहलाती हैं। दो प्रकार की वित्तीय संस्थाएँ होती हैं -
(i) राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ - (क) भारतीय मुद्रा बाजार (ख) भारतीय पूँजी बाजार।
(ii) राज्य स्तरीय वित्तीय संस्थाएँ - (क) गैर संस्थागत वित्तीय संस्थाएँ, (ख) संस्थागत वित्तीय संस्थाएँ।