Question
व्यावसायिक पर्यावरण के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।

Answer

व्यावसायिक पर्यावरण का महत्त्व
मनुष्य की भाँति ही व्यावसायिक संस्था का समाज में अलग से कोई अस्तित्व नहीं होता है। प्रत्येक व्यावसायिक संस्था का अपने पर्यावरण के तत्त्व एवं घटकों या शक्तियों के मध्य अस्तित्व है। वहीं यह सुरक्षित रहता है एवं इसका विकास होता है। व्यावसायिक संस्थाएँ इन घटकों या संस्थाओं पर नियन्त्रण स्थापित करने का प्रयास करती हैं। कुछ इसमें सफल होती हैं और कुछ नहीं। इसके अतिरिक्त ये संस्थाएँ या तो पर्यावरण के विभिन्न घटकों के अनुरूप कार्य करें या अपने आपको समाप्त कर लें। व्यावसायिक संस्था के प्रबन्धक यदि पर्यावरण को भलीभाँति समझते हैं तो वे उनके अनुरूप कार्य कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं। व्यावसायिक संस्थाओं के लिए व्यावसायिक पर्यावरण के महत्त्व को हम निम्न बिन्दुओं की सहायता से समझ सकते हैं- 1. सम्भावनाओं/अवसरों की पहचान करने एवं पहल करने के लाभ-पर्यावरण व्यवसाय की सफलता के लिए अनेक अवसर प्रदान करता है। यदि इन अवसरों की शुरुआत में ही पहचान हो जाती है तो कोई भी व्यावसायिक संस्था अपने प्रतियोगियों से पहले ही इसका लाभ उठा सकती है। उदाहरण के लिए, मारुति उद्योग ने पेट्रोल की बढ़ती कीमतों एवं विशाल भारतीय मध्यम वर्ग के पर्यावरण में छोटी कार की आवश्यकता को पहचान लिया था। उसने इस ओर ध्यान देकर छोटी कारों के बाजार में शीर्ष स्थान प्राप्त कर लिया।
2. खतरे की पहचान एवं समय से पहले चेतावनी में सहायक-पर्यावरण अनेक खतरों का स्रोत होता है। ये खतरे व्यावसायिक संस्था के परिचालन में बाधक हो सकते हैं। पर्यावरण के प्रति यदि प्रबन्धक पूर्णतया सचेत हैं तो वे समय रहते इन खतरों की पहचान कर सकते हैं और समय से पहले चेतावनी में सहायक हो सकते हैं। उदाहरणार्थ, यदि कोई व्यावसायिक संस्था यह पाती है कि एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी भारतीय बाजार में कोई पूरक वस्तु लेकर आती है तो यह समय से पहले की चेतावनी है । इस सूचना के आधार पर भारतीय व्यावसायिक संस्था अपने उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार कर, उत्पादन लागत में कमी कर तथा आक्रामक विज्ञापन देकर तथा ऐसे ही अन्य कदम उठाकर ऐसे खतरे का सामना करने के लिए तैयार हो सकती है।
3. उपयोगी संसाधनों का दोहन-पर्यावरण व्यवसाय संचालन के विभिन्न संसाधनों का स्रोत भी माना जाता है। प्रत्येक व्यावसायिक उपक्रम अपने पर्यावरण से ही वित्त, मशीनें, कच्चा माल, बिजली एवं पानी आदि विभिन्न संसाधनों को जुटाते हैं जो इसके आगत हैं। व्यावसायिक उपक्रम भी पर्यावरण को अपने उत्पाद प्रदान करते हैं जैसे ग्राहकों के लिए वस्तुएँ एवं सेवाएँ, सरकार को कर, निवेशकों के वित्त निवेश पर प्रतिफल आदि। क्योंकि पर्यावरण उपक्रम के लिए संसाधनों का स्रोत है एवं उत्पादों के लिए निर्गमन का स्थान इसलिए यह उचित ही है कि व्यावसायिक संस्था अपनी ऐसी नीति निर्धारित करे। यह आवश्यक संसाधनों को प्राप्त कर सके जिससे कि वह उन संसाधनों को पर्यावरण की इच्छानुरूप निर्गत में परिवर्तित कर सके। लेकिन यह कार्य सुचारु रूप से तभी सम्पन्न हो सकता है जबकि यह समझ लिया जाये कि पर्यावरण हमें क्या दे सकता है?
4. तीव्रता से हो रहे परिवर्तनों का सामना करनाआज व्यावसायिक पर्यावरण अधिक गतिशील हो रहा है क्योंकि इसमें तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। इन महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए प्रबन्धकों को पर्यावरण को समझना चाहिए तथा उचित कार्यवाही करनी चाहिए।
5. नियोजन एवं नीति निर्धारण में सहायता- क्योंकि पर्यावरण व्यावसायिक उपक्रम के लिए अवसर भी है तथा खतरा भी है। अतः इन अवसरों व खतरों को समझकर तथा इनका विश्लेषण करके प्राप्त निष्कर्षों से निर्णय लेने व भविष्य के मार्ग निर्धारण अथवा दिशानिर्देश का यह आधार बन सकता है।
6. निष्पादन में सुधार-पर्यावरण का उपक्रम के परिचालन पर प्रभाव पड़ता है। कई अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि किसी भी व्यावसायिक उपक्रम या संस्था का भविष्य पर्यावरण में जो भी घटित हो रहा है व जो भी परिवर्तन हो रहा है उससे जुड़ा हुआ है। उपक्रम जो अपने पर्यावरण व उससे पड़ने वाले प्रभावों पर ध्यान देते हुए उपयुक्त व्यावसायिक क्रियाएँ करते हैं, वे न केवल अपने वर्तमान निष्पादन में सुधार लाते हैं वरन् बाजार में भी दीर्घ काल तक सफल रहते हैं।

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