व्यक्तित्व के पाँच शील गुण
कुछ वर्षों में आधारभूत व्यक्तित्व विशेषकों की संख्या को लेकर उत्पन्न हुए मतभेदों से एक रुचिकर दिशा परिवर्तन हुआ है। पॉल कॉस्टा तथा राबर्ट मैक्रे ने सभी सम्भावित व्यक्तित्व विशेषकों की जाँच पर पाँच कारकों के एक समुच्चय के विषय में जानकारी दी है। इनको वृहत् पाँच कारकों के रूप में जाना जाता है। ये पाँच कारक निम्नलिखित हैं-
(i) अनुभवों के लिए खुलापन- जो लोग इस कारक के अन्तर्गत अधिक अंक प्राप्त करते हैं वे उत्सुक, कल्पनाशील, सांस्कृतिक क्रियाकलापों एवं नए विचारों के प्रति उदारता में अभिरुचि लेने वाले व्यक्ति होते हैं। दूसरी ओर कम अंक पाने वाले व्यक्तियों में अनन्यता पाई जाती है।
(ii) बहिर्मुखता - यह विशेषता ऐसे लोगों में विद्यमान होती है जिनमें आग्रहिता, सामाजिक सक्रियता, बातूनीपन, बहिर्गमन और आमोद-प्रमोद हेतु पसन्दगी पाई जाती है। दूसरी ओर ऐसे लोग होते हैं जो संकोची होते हैं।
(iii) सहमतिशीलता - यह कारक उन लोगों की विशेषताओं को बताता है जिनमें सहयोग करने, मैत्रीपूर्ण व्यवहार करने, सहायता करने, पोषण करने एवं देखभाल करने जैसे व्यवहार शामिल होते हैं। दूसरी ओर ऐसे लोग होते हैं जो आक्रामक और आत्म-केन्द्रित होते हैं।
(iv) तन्त्रिकाताप-इस कारक के अन्तर्गत अधिक अंक प्राप्त करने वाले लोग सांवेगिक रूप से परेशान, भयभीत, दुश्चितित, अस्थिर, चिड़चिड़े, तनावग्रस्त और दुःखी होते हैं। इससे विपरीत प्रकार के लोग सुसमायोजित होते हैं।
(v) अन्तर्विवेकशीलता- इसके अन्तर्गत अधिक अंक पाने वाले लोगों में उपलब्धि-उन्मुखता, उत्तरदायित्व, निर्भरता, कर्मठता, दूरदर्शिता और आत्म-नियन्त्रण पाया जाता है। दूसरी ओर कम अंक पाने वाले लोगों में आवेग पाया जाता है।
व्यक्तित्व के क्षेत्र में यह पंच-कारक मॉडल एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त विकसित करते हैं। अनेक संस्कृतियों में लोगों के व्यक्तित्व को समझने हेतु यह मॉडल अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हुआ है।