(i) अन्तर्मुखी व्यक्तित्व , (ii) बहिर्मुखी व्यक्तित्व ।
(i) अन्तर्मुखी व्यक्तित्व - ऐसे लोग बाह्य विश्व या समूह से अपने को हटाकर एकान्त जीवन पसन्द करते हैं। भावुकता इनमें अधिक होती है तथा अपनी आलोचनाओं को सहने की शक्ति कम होती है। अधिकांश दार्शनिक तथा कलाकार अन्तर्मुखी व्यक्तित्व के होते हैं।
(ii) बहिर्मुखी व्यक्तित्व - ऐसे लोग व्यवहारकुशल होते हैं। ऐसे व्यक्ति संस्था एवं समूह का जीवन पसन्द करते हैं। आमतौर से राजनीतिक नेता एवं समाज-सुधारक तथा सेना एवं पुलिस के अधिकारी बहिर्मुखी व्यक्तित्व के होते हैं।
फ्रीडमैन एवं रोजेनमैनने टाइप 'ए' तथा टाइप 'बी' इन दो प्रकार के व्यक्तित्वों में लोगों को विभाजित किया है। इन दोनों अध्ययनकर्ताओं ने मनो-सामाजिक जोखिम वाले कारकों का अध्ययन करते हुए इन प्ररूपों की खोज की है। टाइप 'ए' व्यक्तित्व वाले लोगों में उच्चस्तरीय अभिप्रेरणा, उतावलापन तथा कार्य के बोझ से सदैव लदे रहने का अनुभव, धैर्य की कमी, समय की कमी का अनुभव करना पाया जाता है। ऐसे लोग निश्चिन्त होकर मन्दगति से कार्य करने में जटिलता का अनुभव करते हैं। टाइप 'ए' के अन्तर्गत आने वाले लोग अतिरिक्त दाब एवं कॉरोनरी हृदय रोग के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इस प्रकार के लोगों में कभी-कभी उच्च रक्तदाब, सी. एच. डी. के विकसित होने का खतरा, धूम्रपान एवं उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर उत्पन्न होने वाले खतरों की अपेक्षा अधिक होता है। दूसरी ओर टाइप 'बी' व्यक्तित्व को टाइप 'ए' व्यक्तित्व की विशेषताओं के अभाव के रूप में समझा जाता है। मॉरिस ने एक टाइप 'सी' व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार जो कैंसर जैसे रोग के प्रति संवेदनशील होता है ऐसे व्यक्तित्व वाले लोग धैर्यवान, विनीत एवं सहयोगशील होते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने संवेगों (जैसे-क्रोध) को रोकने वाले तथा आप्त व्यक्तियों के प्रति आज्ञा को मानने वाले होते हैं। नवीन शोधों में एक टाइप 'डी' व्यक्तित्व का सुझाव भी दिया गया है। ऐसे व्यक्तित्व वाले लोगों में अवसाद हेतु प्रवणता पाई जाती है।
उपरोक्त व्यक्तित्व के प्रारूप सामान्यतया आकर्षित करने वाले हैं अपितु वे बहुत सरल हैं। मानव व्यवहार अत्यधिक परिवर्तनशील व कठिन होता है। लोगों को किसी एक विशेष व्यक्तित्व प्रारूप में विभाजित करना जटिल होता है। उपरोक्त सरल वर्गीकरण योजना में स्पष्टता के साथ लोगों को विभाजित करना पूरी तरह सम्भव नहीं है।